नई दिल्ली | 16 अप्रैल, 2026
खेल की दुनिया में पदक की चमक के पीछे छिपे ‘डोपिंग’ के काले सच को लेकर भारत ने अब तक का सबसे सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मंडाविया के हालिया बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि डोपिंग अब केवल एक व्यक्तिगत चूक नहीं, बल्कि एक सुनियोजित ‘अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट’ का हिस्सा बन चुकी है। नई दिल्ली में आयोजित वाडा (WADA) की महत्वपूर्ण कॉन्फ्रेंस में भारत ने इस वैश्विक नेटवर्क को ध्वस्त करने का ब्लूप्रिंट पेश किया।
‘संगठित अपराध’ है डोपिंग: खेल मंत्री का बड़ा खुलासा
गुरुवार को ‘विश्व एंटी-डोपिंग एजेंसी’ (WADA) की इंटेलिजेंस एंड इन्वेस्टिगेशन कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए खेल मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा कि डोपिंग अब एक ‘संगठित मल्टीनेशनल एंटरप्राइज’ का रूप ले चुका है। मंडाविया के अनुसार, पर्दे के पीछे काम करने वाले ड्रग तस्कर और बड़े नेटवर्क मासूम खिलाड़ियों तक प्रतिबंधित दवाएं पहुँचा रहे हैं।
इस खतरे की गंभीरता को देखते हुए, भारत सरकार अब ‘आपराधिक प्रावधान’ (Criminal Provisions) लाने की तैयारी में है। इसका सीधा अर्थ यह है कि भविष्य में यदि कोई कोच, डॉक्टर या स्टाफ किसी खिलाड़ी को प्रतिबंधित दवा देते हुए या उनकी तस्करी में शामिल पाया जाता है, तो उसे सीधे जेल की सजा भुगतनी होगी।

आंकड़ों की चुनौती और भारत की वापसी
भारत के लिए यह सख्त कानून समय की मांग बन गया है। हाल ही में ‘एथलेटिक्स इंटीग्रिटी यूनिट’ की रिपोर्ट में भारत डोपिंग उल्लंघन के मामले में शीर्ष पर पहुंच गया था, यहाँ तक कि हमने केन्या जैसे देशों को भी पीछे छोड़ दिया। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में जमीनी स्तर पर बड़े बदलाव हुए हैं:
- टेस्टिंग में उछाल: 2019 में जहां केवल 4,000 टेस्ट होते थे, वहीं पिछले साल यह संख्या बढ़कर 8,000 तक पहुँच गई।
- सफलता की दर: व्यापक जांच के कारण पॉजिटिव मामलों की दर 5.6% (2019) से घटकर अब 2% से भी कम रह गई है।
‘ऑपरेशन अपस्ट्रीम’: 90 टन प्रतिबंधित दवाएं जब्त
कॉन्फ्रेंस के दौरान ‘ऑपरेशन अपस्ट्रीम’ (Operation Upstream) के परिणामों ने सबको चौंका दिया। इंटरपोल और वाडा की संयुक्त जांच में एशिया के बड़े सप्लायर्स को निशाना बनाया गया है।
वाडा अध्यक्ष विटोल्ड बांका ने जानकारी दी कि इस मुहिम के तहत अब तक:
- दुनिया भर में 88 अवैध लैब नष्ट की जा चुकी हैं।
- लगभग 90 टन (1.8 बिलियन डोज) प्रदर्शन बढ़ाने वाली दवाएं जब्त की गई हैं।
- एशिया और ओशिनिया के 51 देशों ने इस जांच में सक्रिय भूमिका निभाई है।
इंटरपोल के निक कोर्ट ने स्पष्ट किया कि डोपिंग के खिलाफ अब एक ‘एकीकृत वैश्विक प्रतिक्रिया’ (Global Response) की जरूरत है, जहां कानून प्रवर्तन एजेंसियां और एंटी-डोपिंग संगठन कंधे से कंधा मिलाकर काम करें।
तकनीक और सुरक्षा: ‘नो योर मेडिसिन’ ऐप
भारत सरकार केवल सजा ही नहीं, बल्कि सुरक्षा पर भी ध्यान दे रही है। खिलाड़ियों को अनजाने में होने वाली डोपिंग से बचाने के लिए ‘Know Your Medicine’ मोबाइल ऐप को एक गेम-चेंजर माना जा रहा है। इसके माध्यम से एथलीट किसी भी दवा में मौजूद साल्ट की जांच कर सकते हैं। साथ ही, दिव्यांग खिलाड़ियों (Para-Athletes) के लिए विशेष एजुकेशन मॉड्यूल तैयार किए गए हैं ताकि उन्हें सिस्टम की पूरी जानकारी रहे।
निष्कर्ष: ‘क्लीन स्पोर्ट्स’ की ओर बढ़ता भारत
भारत का लक्ष्य स्पष्ट है—मैदान पर सिर्फ मेडल जीतना ही काफी नहीं है, बल्कि उन मेडल्स की शुचिता भी अनिवार्य है। नाडा (NADA) और वाडा (WADA) के साथ मिलकर भारत उन सभी नेटवर्क को जड़ से उखाड़ने की तैयारी में है जो खेल भावना को प्रदूषित कर रहे हैं। 1 जनवरी 2027 से लागू होने वाले नए अंतरराष्ट्रीय मानकों के साथ, भारतीय खेलों में पारदर्शिता का एक नया युग शुरू होने की उम्मीद है।
संपादकीय विश्लेषण: क्या खिलाड़ियों के बजाय उनके पीछे छिपे ‘असली दोषियों’ (कोच और सप्लायर्स) को जेल भेजना भारतीय खेलों की छवि सुधारने का सबसे कारगर तरीका साबित होगा? यह तो वक्त बताएगा, लेकिन सरकार के इस कड़े रुख ने खेल जगत के माफियाओं में डर जरूर पैदा कर दिया है।
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