विश्लेषण | नई दिल्ली: भारत में विश्वविद्यालय खेलों को अधिक पेशेवर, पारदर्शी और खिलाड़ी-केंद्रित बनाने के लिए Indian Unisports Federation (IUSF) का गठन एक सकारात्मक अवसर है। युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय की 5 अक्टूबर 2026 की प्रोविजनल मान्यता ने नई संस्था को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी है। यदि फेडरेशन को सही ढंग से चलाया गया, तो यह विश्वविद्यालय खेलों के लिए बड़ा गेम चेंजर बन सकती है। इसके लिए मान्यता के साथ जवाबदेही, बेहतर प्रशिक्षण और निष्पक्ष चयन को जमीन पर उतारना होगा।
स्पोर्ट्सनेट इंटेल को मिली जानकारी के अनुसार, IUSF की बैठक 11 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में निर्धारित है। नई संस्था के सामने अपनी कार्ययोजना और विश्वविद्यालयों के साथ समन्वय की दिशा स्पष्ट करने का अवसर है। बैठक के निर्णय सामने आने के बाद ही उसके परिणामों पर निष्कर्ष निकाला जा सकेगा।
IUSF का गठन क्यों एक सकारात्मक अवसर है
विश्वविद्यालय खेल केवल सालाना टूर्नामेंट आयोजित करने तक सीमित नहीं होने चाहिए। छात्र-खिलाड़ी को पढ़ाई के साथ नियमित प्रशिक्षण, योग्य प्रशिक्षक, खेल विज्ञान, चोट के उपचार, पोषण और आगे बढ़ने का स्पष्ट रास्ता भी चाहिए। विश्वविद्यालय से वरिष्ठ राष्ट्रीय टीम और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक की यात्रा को व्यवस्थित करने के लिए समर्पित खेल संस्था उपयोगी हो सकती है।
मंत्रालय का आदेश भी इसी व्यापक भूमिका की ओर संकेत करता है। इसमें प्रतिभा पहचान, विशेष प्रशिक्षण, खेल विज्ञान, स्ट्रेंथ एवं कंडीशनिंग, खेल चिकित्सा, पोषण, मनोवैज्ञानिक सहयोग और अंतरराष्ट्रीय अवसरों के जरिए विश्वविद्यालय खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने की व्यवस्था विकसित करने का दायित्व दिया गया है। यदि इन उद्देश्यों पर प्रभावी काम हुआ, तो नई फेडरेशन की उपयोगिता प्रतियोगिताओं के आयोजन से कहीं आगे जा सकती है।
मंत्रालय की मान्यता में क्या जिम्मेदारियाँ दी गई हैं
मंत्रालय ने IUSF को विश्वविद्यालय खेलों के लिए राष्ट्रीय खेल महासंघ के रूप में प्रोविजनल मान्यता दी है। आदेश में 5 जुलाई 2026 के आवेदन का उल्लेख है और मान्यता पत्र जारी होने की तारीख से प्रभावी है। इसे बिना शर्त स्थायी स्वीकृति समझना सही नहीं होगा।
आदेश के अनुसार, FISU प्रतियोगिताओं के लिए भारतीय विश्वविद्यालय दल का चयन IUSF करेगी, जिसमें संबंधित खेल के राष्ट्रीय महासंघ से उचित तकनीकी सहयोग लिया जाएगा। साथ ही, IUSF को व्यक्तिगत खेलों का समानांतर तकनीकी महासंघ नहीं बनना है। संबंधित खेल के राष्ट्रीय महासंघ अपनी विधा के तकनीकी प्राधिकारी बने रहेंगे।
यह विभाजन उपयोगी हो सकता है: विश्वविद्यालय खेलों की समर्पित संस्था खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं के समन्वय पर काम करे, जबकि संबंधित खेल महासंघ तकनीकी मानक, प्रशिक्षण और officiating में सहयोग दें। इसकी सफलता स्पष्ट जिम्मेदारियों और व्यावहारिक समन्वय पर निर्भर होगी।
नई संस्था को अवसर मिला है, अब क्षमता दिखानी होगी
मान्यता देते समय मंत्रालय ने तीन वर्ष से अस्तित्व में होने, राज्य या केंद्रशासित प्रदेश की संबंधित इकाई से 50 प्रतिशत जिला स्तर के संघों की संबद्धता और अंतरराष्ट्रीय महासंघ से संबद्धता की पात्रता शर्तों में छूट दी है। किसी नई संस्था को अवसर देना अपने आप में अनुचित नहीं है। लेकिन इस अवसर का मूल्य उसके काम, संस्थागत क्षमता और सार्वजनिक जवाबदेही से तय होगा।
IUSF को छह महीने में अपने संविधान और प्रशासनिक व्यवस्था को National Sports Governance Act, 2025 तथा संबंधित नियमों के अनुरूप करना है। संबंधित अंतरराष्ट्रीय महासंघ से संबद्धता हासिल करने के लिए भी छह महीने की शर्त रखी गई है। छूट के आधार और अनुपालन की प्रगति सार्वजनिक होने से नई व्यवस्था के प्रति विश्वास बढ़ेगा।
सही संचालन से कैसे बन सकती है गेम चेंजर
IUSF की सबसे बड़ी संभावना विश्वविद्यालयों को एक साझा और भरोसेमंद खेल व्यवस्था से जोड़ने में है। इसके लिए स्पष्ट प्रतियोगिता कैलेंडर, पहले से घोषित चयन मानदंड, समय पर परिणाम और शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई प्राथमिकताएँ होनी चाहिए। खिलाड़ियों को यह पता होना चाहिए कि चयन किस आधार पर हुआ और अपील कहाँ की जा सकती है।
यदि प्रतिभा पहचान को नियमित प्रशिक्षण और बेहतर सहायता से जोड़ा गया, तो दूरस्थ क्षेत्रों और कम संसाधन वाले विश्वविद्यालयों के खिलाड़ियों को भी लाभ मिल सकता है। अच्छे प्रदर्शन का अवसर केवल मजबूत संस्थानों तक सीमित न रहे, यही नई व्यवस्था की महत्वपूर्ण कसौटी होगी।
मंत्रालय ने निर्वाचित पदाधिकारियों, खिलाड़ियों और महिलाओं के प्रतिनिधित्व, हितों के टकराव से निपटने, लेखा परीक्षण, RTI संबंधी निर्देशों, वेबसाइट पर जानकारी सार्वजनिक करने और शिकायत निवारण जैसे दायित्व भी दिए हैं। ये प्रावधान व्यवहार में लागू हुए, तो नई फेडरेशन विश्वविद्यालय खेल प्रशासन का स्तर ऊपर उठा सकती है।
AIU के अनुभव का लाभ और नई व्यवस्था के बीच समन्वय
Association of Indian Universities (AIU) के विश्वविद्यालय खेलों में लंबे अनुभव को नजरअंदाज करना उपयोगी नहीं होगा। नई संस्था के गठन का समर्थन करते हुए भी स्थापित व्यवस्थाओं, विश्वविद्यालयों और खिलाड़ियों के साथ सुचारु समन्वय जरूरी है। यदि मौजूदा व्यवस्था में कमियाँ रही हैं, तो नई संस्था को उनसे सीखते हुए बेहतर प्रणाली विकसित करनी चाहिए।
5 अक्टूबर के इस आदेश में AIU की मान्यता वापस लेने या उसकी प्रतियोगिताएँ बंद करने का निर्देश नहीं है। इसलिए अभी यह कहना सही नहीं होगा कि AIU का खेल विभाग समाप्त कर दिया गया है। मंत्रालय और संबंधित संस्थाओं को मौजूदा प्रतियोगिताओं, प्रमाणपत्रों और अंतरराष्ट्रीय चयन के बीच जिम्मेदारियाँ स्पष्ट करनी चाहिए।
किसी पुराने संगठन से जुड़े व्यक्ति का नई संस्था में आना अपने आप में अनियमितता नहीं है। अनुभव उपयोगी हो सकता है, लेकिन पदाधिकारियों के लिए समान जवाबदेही और हितों के टकराव की स्पष्ट व्यवस्था आवश्यक है। केवल नया नाम पर्याप्त नहीं होगा; बेहतर कामकाज दिखना चाहिए।
FISU संबद्धता और खिलाड़ियों के अवसर सुरक्षित रखना जरूरी
सरकारी मान्यता और FISU की अंतरराष्ट्रीय संबद्धता अलग प्रक्रियाएँ हैं। FISU की सार्वजनिक सदस्य सूची में भारत की संस्था के रूप में AIU का नाम दर्ज है। इसलिए IUSF को मिली प्रोविजनल सरकारी मान्यता को FISU सदस्यता मिलने की घोषणा नहीं माना जा सकता।
नई व्यवस्था के दौरान खिलाड़ियों की प्रविष्टियाँ, चयन और अंतरराष्ट्रीय भागीदारी प्रभावित न हों, इसके लिए स्पष्ट समन्वय जरूरी है। यदि निर्धारित शर्तें पूरी करने में कठिनाई आती है, तो आगे की प्रक्रिया भी समय पर स्पष्ट होनी चाहिए। आदेश में विभिन्न परिस्थितियों में मान्यता की समीक्षा या वापसी का प्रावधान है; छह महीने पूरे होने पर स्वतः रद्द होने की बात नहीं लिखी गई है।
11 अक्टूबर की बैठक से कार्ययोजना स्पष्ट होने की उम्मीद
नई दिल्ली में 11 अक्टूबर को निर्धारित बैठक के संदर्भ में विश्वविद्यालयों और खिलाड़ियों की स्वाभाविक अपेक्षा होगी कि फेडरेशन अपनी प्राथमिकताएँ स्पष्ट करे। सदस्यता, प्रतियोगिता कैलेंडर, प्रशिक्षण सहायता, चयन व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय संबद्धता पर सार्वजनिक कार्ययोजना आगे की दिशा समझने में मदद करेगी। ये अपेक्षाएँ हैं; इन्हें बैठक का घोषित एजेंडा या लिया गया निर्णय नहीं माना जाना चाहिए।
विश्वविद्यालय खेलों को समर्पित एक मजबूत संस्था की संभावना का स्वागत किया जाना चाहिए। IUSF को मिला अवसर महत्वपूर्ण है और उसका सही उपयोग भारतीय खेलों की प्रतिभा श्रृंखला को मजबूत कर सकता है। यदि फेडरेशन पारदर्शिता, योग्य नेतृत्व और खिलाड़ी के हित को प्राथमिकता देकर चलाई गई, तो यह विश्वविद्यालय खेलों के लिए वास्तव में बड़ा गेम चेंजर बन सकती है।
स्रोत एवं संपादकीय स्पष्टता: मान्यता और शर्तों का विवरण मंत्रालय के आदेश संख्या F.No.10-02/2026/GOV-II, दिनांक 5 अक्टूबर 2026 पर आधारित है। मंत्रालय की मान्यता सूचना तथा FISU की भारत सदस्य सूची संदर्भ के लिए उपलब्ध हैं। बैठक की तारीख और शहर स्पोर्ट्सनेट इंटेल को उपलब्ध कराई गई जानकारी पर आधारित हैं। लेख में IUSF की संभावनाओं पर व्यक्त विचार संपादकीय विश्लेषण हैं।






