खेलो इंडिया खर्च और परिणाम पर चर्चा करते समय दो बातों को अलग रखना जरूरी है। पहली, सरकार ने कितना पैसा रखा। दूसरी, उस पैसे से खिलाड़ियों और खेल व्यवस्था में कितना सुधार हुआ। केवल बजट बढ़ना अपने आप सफलता का प्रमाण नहीं है।
वर्ष 2026-27 में खेलो इंडिया के लिए 924.35 करोड़ रुपये रखे गए हैं। सरकारी बजट विवरण के अनुसार 2021-22 से 2025-26 के लिए 3,790.50 करोड़ रुपये की योजना मंजूर थी। मंजूर राशि, हर वर्ष का बजट और वास्तव में खर्च की गई राशि एक ही बात नहीं हैं।
2020-21 से कितना पैसा आवंटित हुआ?
लोकसभा में दिए गए उत्तर के अनुसार राशि इस प्रकार थी:
| वित्त वर्ष | आवंटित राशि |
|---|---|
| 2020-21 | 328.77 करोड़ रुपये |
| 2021-22 | 869 करोड़ रुपये |
| 2022-23 | 600 करोड़ रुपये |
| 2023-24 | 880 करोड़ रुपये |
| 2024-25 | 746.54 करोड़ रुपये |
| 2025-26 | 1,000 करोड़ रुपये |
| 2026-27 | 924.35 करोड़ रुपये |
2020-21 से 2025-26 तक कुल आवंटन 4,424.31 करोड़ रुपये बनता है। लेकिन यह पूरी राशि खर्च हुई या नहीं, इसके लिए अलग-अलग वर्षों के वास्तविक खर्च का विवरण देखना होगा।
सरकार किन बातों को उपलब्धि मानती है?
जुलाई 2026 की सरकारी समीक्षा में 349 नई खेल परियोजनाएं, 1,067 खेलो इंडिया केंद्र, 267 सहायता प्राप्त अकादमियां और 2,745 सहायता प्राप्त खिलाड़ी बताए गए हैं। वर्ष 2018 से खेलो इंडिया प्रतियोगिताओं में 63,000 से अधिक खिलाड़ियों ने भाग लिया है।
ये आंकड़े बताते हैं कि योजना का दायरा बढ़ा है। लेकिन असली नतीजा यह होगा कि इनमें से कितने खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे।
क्या अंतरराष्ट्रीय पदक केवल खेलो इंडिया की देन हैं?
भारत ने रियो ओलंपिक 2016 में 2, टोक्यो में 7 और पेरिस 2024 में 6 पदक जीते। एशियाई खेलों में भारत के पदक 2014 के 57 से बढ़कर 2023 में 107 हो गए। यह सुधार महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका पूरा श्रेय केवल खेलो इंडिया को नहीं दिया जा सकता।
खिलाड़ियों को राष्ट्रीय महासंघों, सेना, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों, राज्य अकादमियों, निजी संस्थाओं, व्यक्तिगत प्रशिक्षकों और लक्ष्य ओलंपिक पोडियम योजना से भी सहायता मिलती है।
योजना की सफलता कैसे मापी जाए?
- खेलो इंडिया में चुने गए कितने खिलाड़ी तीन और पांच वर्ष बाद भी खेल रहे हैं।
- कितने जूनियर खिलाड़ी वरिष्ठ भारतीय टीम तक पहुंचे।
- हर खेल में खिलाड़ियों के मुकाबले प्रशिक्षकों की संख्या क्या है।
- ग्रामीण, शहरी, महिला और पुरुष खिलाड़ियों को समान अवसर मिल रहे हैं या नहीं।
- सहायता प्राप्त खिलाड़ियों ने कितनी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताएं, अंतिम दौर और पदक हासिल किए।
अब क्या सुधार जरूरी है?
सरकार ने अगले दस वर्ष के लिए खेलो इंडिया मिशन की घोषणा की है। इसे सफल बनाने के लिए कई वर्षों की निश्चित सहायता, अच्छे प्रशिक्षक, खेल विज्ञान, सही भोजन और सुविधाओं के रखरखाव की जरूरत है।
राष्ट्रीय खेल महासंघ सम्मेलन 2026 की हमारी रिपोर्ट में सरकार और महासंघों के बेहतर तालमेल की जरूरत बताई गई थी। एशियाई खेल 2026 के पदक अनुमान से भी पता चलता है कि जमीनी प्रतिभा को बड़े पदकों में बदलना अगली परीक्षा है।
निष्कर्ष
खेलो इंडिया ने प्रतियोगिताओं, केंद्रों और खिलाड़ी सहायता का दायरा बढ़ाया है। इसे असफल कहना सही नहीं होगा। लेकिन अंतरराष्ट्रीय विजेता तैयार होने का मजबूत प्रमाण तभी मिलेगा, जब सरकार आवंटन के साथ वास्तविक खर्च और हर खिलाड़ी की आगे की प्रगति के आंकड़े भी नियमित रूप से जारी करे।








