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इस रिपोर्ट में यह भी: भोलानाथ सिंह की आपत्ति और दिलीप तिर्की के पत्र में अगली प्रक्रिया
नरिंदर बत्रा की प्रतिक्रिया: स्वतंत्र निर्णय और निष्पक्ष सुनवाई की अपील
यह भी पढ़ें: हॉकी इंडिया में बढ़ा टकराव—आरके श्रीवास्तव की शक्तियां रोकने पर भोलानाथ सिंह की आपत्ति और बत्रा की प्रतिक्रिया
एक तरफ Hockey India के अंदर प्रशासनिक विवाद चल रहा है, दूसरी तरफ उसकी सबसे बड़ी पेशेवर लीग की आर्थिक हालत पर सवाल खड़े हो गए हैं। खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने Hockey India और HIL फ्रेंचाइजी मालिकों के साथ बैठक कर लीग को लंबे समय तक चलाने के लिए नया खाका तैयार करने को कहा है।
नई दिल्ली, 15 सितंबर 2026: कुछ ही महीने पहले Hockey India अगले Hockey India League सीजन को और बड़ा बनाने की बात कर रहा था। खिलाड़ियों के पंजीकरण खोले गए, सितंबर में नीलामी और जनवरी 2027 में अगला सीजन कराने की तैयारी शुरू हुई।
लेकिन अब स्थिति ऐसी है कि खुद केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया को Hockey India और लीग की फ्रेंचाइजी के साथ बैठकर HIL के भविष्य पर चर्चा करनी पड़ी है।
14 सितंबर को हुई बैठक में मांडविया ने Hockey India और फ्रेंचाइजी मालिकों से ऐसा ठोस खाका बनाने को कहा जिससे लीग आर्थिक रूप से अपने पैरों पर खड़ी हो सके और लंबे समय तक चल सके।
PTI की रिपोर्ट के अनुसार, मंत्री ने इसके लिए पांच सदस्यीय समिति बनाने को कहा है। इसमें Hockey India और फ्रेंचाइजी के दो-दो प्रतिनिधि तथा खेल मंत्रालय का एक वरिष्ठ अधिकारी शामिल होगा। समिति को प्रशासनिक और वित्तीय ढांचे पर काम कर मंत्रालय को समयबद्ध रिपोर्ट देनी है।
यह बैठक अपने आप में बताती है कि HIL के सामने समस्या केवल अगले सीजन के आयोजन की नहीं है। सवाल अब लीग के लंबे भविष्य का है।
सात साल बाद लौटी थी Hockey India League
Hockey India League की शुरुआत 2013 में हुई थी, लेकिन आर्थिक परेशानियों के बाद 2017 में इसे रोक दिया गया।
करीब सात साल के अंतराल के बाद 2024-25 में इसे नए रूप में वापस लाया गया। पुरुषों के साथ पहली बार महिलाओं की लीग को भी प्रमुखता से शामिल किया गया।
2025-26 के पिछले सीजन में आठ पुरुष और चार महिला फ्रेंचाइजी खेलीं। Hockey India के अनुसार एक हजार से ज्यादा भारतीय और विदेशी खिलाड़ियों ने नीलामी के लिए पंजीकरण कराया था।
मैदान पर लीग ने अच्छे मुकाबले दिए। पुरुषों का खिताब Vedanta Kalinga Lancers ने जीता, जबकि महिलाओं की प्रतियोगिता में SG Pipers विजेता रही।
इसके बाद Hockey India ने मई 2026 में अगले सीजन के लिए खिलाड़ियों का पंजीकरण खोल दिया। आधिकारिक योजना के अनुसार खिलाड़ी नीलामी सितंबर में और अगला HIL जनवरी 2027 में होना है।
लेकिन मैदान के बाहर तस्वीर इतनी अच्छी नहीं रही।
महिला लीग की स्थिति ज्यादा चिंता वाली
पिछले कुछ समय से HIL की कई फ्रेंचाइजी की आर्थिक स्थिति को लेकर खबरें आती रही हैं।
महिला लीग को लेकर स्थिति विशेष रूप से चिंता का विषय बनी। रिपोर्टों के अनुसार एक महिला फ्रेंचाइजी प्रतियोगिता से हट चुकी है और कुछ दूसरी टीमों के भविष्य को लेकर भी अनिश्चितता रही है।
26 अगस्त की Hindustan Times रिपोर्ट में Ranchi Royals की महिला टीम के प्रतियोगिता से हटने और खिलाड़ियों तथा प्रशिक्षकों के भुगतान लंबित होने की बात कही गई थी।
इससे पहले पुरुष और महिला दोनों वर्गों में कुछ फ्रेंचाइजी आर्थिक कारणों या दूसरे कारणों से पीछे हट चुकी हैं।
यानी यह संकट अचानक सितंबर 2026 में पैदा नहीं हुआ।
फ्रेंचाइजी आधारित हॉकी लीग को चलाने का खर्च और उससे होने वाली आय के बीच संतुलन लंबे समय से सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है।
मांडविया ने फ्रेंचाइजी मालिकों की बात सुनी
खेल मंत्री की बैठक में Hockey India के अधिकारियों के साथ कई HIL फ्रेंचाइजी के प्रतिनिधि मौजूद थे।
बैठक का मुख्य मुद्दा था—लीग को आर्थिक रूप से टिकाऊ कैसे बनाया जाए।
इसके लिए बनने वाली पांच सदस्यीय समिति को अब केवल अगला सीजन कराने का रास्ता नहीं ढूंढना होगा, बल्कि यह तय करना होगा कि ऐसा ढांचा कैसे बने जिसमें टीम मालिक लगातार घाटा उठाकर प्रतियोगिता छोड़ने को मजबूर न हों।
लीग को बचाना है तो कुछ बुनियादी सवालों के जवाब भी ढूंढने होंगे।
फ्रेंचाइजी की कमाई कैसे बढ़ेगी?
टीम चलाने का खर्च कैसे नियंत्रित होगा?
प्रायोजकों और प्रसारण से मिलने वाली आय का ढांचा क्या होगा?
महिला लीग को पुरुष लीग के बराबर स्थिर आधार कैसे मिलेगा?
और खिलाड़ियों तथा प्रशिक्षकों के भुगतान समय पर हों, इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
नई समिति के सामने असली चुनौती यही है।
पहले ही HIL बचाने के लिए मुलाकातें कर रहे थे दिलीप तिर्की
Hockey India अध्यक्ष दिलीप तिर्की भी पिछले कुछ समय से HIL को बचाने के लिए सरकार, कॉरपोरेट घरानों और फ्रेंचाइजी मालिकों से बातचीत कर रहे हैं।
तिर्की ने खुद कहा है कि लीग का महत्व केवल एक सीजन तक सीमित नहीं है।
यह बात सही भी है।
भारत में हॉकी खिलाड़ियों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के साथ खेलने और अच्छी कमाई का मौका देने वाली कोई दूसरी बड़ी घरेलू पेशेवर प्रतियोगिता HIL जैसी नहीं है।
खासकर महिला खिलाड़ियों के लिए लीग बंद होना बड़ा झटका होगा।
भारतीय महिला हॉकी की अंतरराष्ट्रीय स्थिति मजबूत करने के लिए ज्यादा उच्च स्तर के घरेलू मुकाबलों की जरूरत है, कम की नहीं।
संकट के बीच Hockey India में अंदरूनी विवाद भी
HIL की आर्थिक समस्या ऐसे समय सामने आई है जब Hockey India खुद प्रशासनिक विवाद से गुजर रहा है।
अध्यक्ष दिलीप तिर्की ने हाल ही में महानिदेशक आरके श्रीवास्तव की शक्तियां रोकते हुए उन्हें कारण बताओ नोटिस दिया है। उनके खिलाफ लगाए गए आरोप अभी साबित नहीं हुए हैं और उन्हें जवाब देने के लिए समय दिया गया है।
महासचिव भोलानाथ सिंह ने पहले इस कार्रवाई के प्राधिकार और उपनियमों की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई थी। अब नरिंदर बत्रा द्वारा WhatsApp पर साझा किए गए, दिलीप तिर्की के नाम से जारी 14 सितंबर के पत्र की प्रति में तिर्की ने पूरे मामले को कार्यकारिणी की उपलब्ध सबसे शीघ्र अनुमत आपात बैठक में रखने की बात कही है। भोलानाथ को संबोधित इस पत्र के अनुसार, कार्यकारिणी आगे की अनुशासनात्मक प्रक्रिया, जाँच लंबित रहने के दौरान औपचारिक निलंबन की आवश्यकता और स्वतंत्र जाँच पर विचार करेगी।
तिर्की ने पत्र में कहा है कि तब तक 12 सितंबर के अस्थायी निर्देश जारी रहेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि श्रीवास्तव को दोषी घोषित या सेवा से बर्खास्त नहीं किया गया है, उनका पारिश्रमिक और सामान्य सेवा लाभ सुरक्षित हैं तथा जवाब देने के लिए चार सप्ताह दिए गए हैं। साझा पत्र किसी बैठक, मतदान या नए अंतिम निलंबन आदेश की पुष्टि नहीं करता। यह प्रक्रिया HIL के वित्तीय ढांचे के लिए प्रस्तावित पांच सदस्यीय समिति से अलग है।
15 सितंबर की अपनी अलग WhatsApp प्रतिक्रिया में पूर्व अध्यक्ष नरिंदर ध्रुव बत्रा ने तिर्की का समर्थन किया और कार्यकारिणी से स्वतंत्र निर्णय लेने की अपील की। उन्होंने श्रीवास्तव को पूरा और निष्पक्ष बचाव का अवसर देने तथा प्रक्रिया पूरी होने से पहले कोई निष्कर्ष तय नहीं करने की बात भी कही। पत्र तिर्की का पक्ष है और यह अलग बयान बत्रा की प्रतिक्रिया है।
इस पूरे मामले पर Sportsnet News पहले विस्तार से रिपोर्ट कर चुका है।
अब उसी समय HIL के भविष्य पर खेल मंत्रालय की बैठक ने Hockey India पर दबाव और बढ़ा दिया है।
एक राष्ट्रीय खेल संघ के लिए यह अच्छी स्थिति नहीं कही जा सकती कि एशियाई खेल कुछ ही दिन दूर हों, अंदर प्रशासनिक विवाद चल रहा हो और उसकी प्रमुख पेशेवर लीग की आर्थिक स्थिरता पर अलग बैठक करनी पड़े।
फिर भी HIL को खत्म मानना जल्दबाजी होगी
मौजूदा संकट गंभीर है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि HIL बंद होने जा रही है।
Hockey India ने आधिकारिक रूप से 2027 edition की योजना वापस नहीं ली है। खिलाड़ियों का पंजीकरण हो चुका है और अगला सीजन जनवरी में कराने की घोषणा पहले से है।
अब फर्क यह है कि अगले सीजन से पहले पूरे व्यापारिक ढांचे को मजबूत करने की जरूरत सरकार और Hockey India दोनों स्वीकार करते दिखाई दे रहे हैं।
अगर पांच सदस्यीय समिति केवल बैठक और रिपोर्ट तक सीमित रही तो समस्या कुछ महीनों बाद फिर सामने आ सकती है।
लेकिन अगर लीग की आय, फ्रेंचाइजी खर्च, खिलाड़ियों के भुगतान, प्रायोजन, प्रसारण और महिला लीग के भविष्य पर साफ और व्यावहारिक व्यवस्था बनती है, तो यह संकट HIL को ज्यादा मजबूत बनाने का मौका भी बन सकता है।
भारतीय हॉकी के लिए HIL का बचना जरूरी
HIL को केवल एक निजी लीग मानना सही नहीं होगा।
इसका सीधा असर भारतीय हॉकी के खिलाड़ियों पर पड़ता है।
युवा भारतीय खिलाड़ियों को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों के साथ खेलने का मौका मिलता है। भारतीय प्रशिक्षकों, तकनीकी अधिकारियों और अंपायरों को भी बड़े स्तर पर काम करने का अनुभव मिलता है।
और सबसे महत्वपूर्ण—हॉकी को साल में कुछ अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के अलावा भी दर्शकों के सामने बने रहने का मंच मिलता है।
इसलिए असली सवाल यह नहीं है कि जनवरी 2027 में HIL किसी तरह आयोजित हो जाएगी या नहीं।
असली सवाल यह है कि क्या ऐसा Hockey India League मॉडल बनाया जा सकता है जो हर साल संकट में पड़े बिना लंबे समय तक चल सके?
खेल मंत्री की बैठक के बाद अब Hockey India और पांच सदस्यीय समिति के सामने यही सबसे बड़ी परीक्षा है।






