खाली भारतीय फुटबॉल स्टेडियम में league calendar और governance documents का संपादकीय दृश्य
Indian football का संकट ranking, calendar, league economics और governance—चारों से जुड़ा है।

भारतीय फुटबॉल संकट को केवल एक हार, एक प्रशिक्षक या विश्व वरीयता से नहीं समझा जा सकता। भारत की पुरुष टीम 11 जून 2026 की फीफा सूची में 138वें स्थान पर थी। टीम एशियाई कप 2027 के लिए योग्यता भी हासिल नहीं कर सकी। इसी समय घरेलू प्रतियोगिताओं की व्यवस्था और कमाई का ढांचा बदला जा रहा है।

फीफा के भारत पृष्ठ में वर्तमान स्थान 138, अब तक का सर्वोच्च स्थान 94 और औसत स्थान 129 दर्ज है। विश्व वरीयता समस्या का संकेत है, पूरी समस्या नहीं।

एशियाई कप में नाकामी

भारत ने मार्च 2026 में हांगकांग को 2-1 से हराकर अभियान समाप्त किया, लेकिन तब तक योग्यता की दौड़ से बाहर हो चुका था। एआईएफएफ की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार सिंगापुर 14 अंकों के साथ समूह में पहले स्थान पर रहा।

बांग्लादेश से हार और शुरुआती मुकाबलों में अंक गंवाने से साफ है कि भारत महत्वपूर्ण समय पर गोल नहीं कर पाया। कमजोर मानी जाने वाली रक्षात्मक टीमों के खिलाफ भी भारत के आक्रमण में नए तरीके दिखाई नहीं दिए।

एआईएफएफ की व्यवस्था में क्या बदला?

20 जून 2026 की विशेष बैठक में राष्ट्रीय खेल प्रशासन कानून 2025 के अनुसार नया संविधान मंजूर किया गया। चुनावों की निगरानी के लिए एक चुनाव मंडल बनाने का भी निर्णय लिया गया।

संविधान बदलना पहला कदम है। असली सुधार तब माना जाएगा जब हितों के टकराव, चुनाव, जांचे हुए खातों, राज्य संघों के काम और शिकायतों के निपटारे की जानकारी समय पर सार्वजनिक हो।

घरेलू प्रतियोगिताओं का कार्यक्रम

2026-27 का पुरुष और महिला सत्र 1 जून 2026 से 31 मई 2027 तक रखा गया है। इंडियन सुपर लीग 4 सितंबर और इंडियन फुटबॉल लीग 16 अक्टूबर से शुरू होनी है। केवल तारीख घोषित करना काफी नहीं है। मुकाबले समय पर हों, प्रसारण की व्यवस्था हो और क्लबों को कमाई की स्पष्ट जानकारी मिले—यह भी जरूरी है।

नई व्यवस्था में क्लब प्रतियोगिता के व्यावसायिक अधिकार संभालेंगे और एआईएफएफ खेल संबंधी निगरानी रखेगा। घर और बाहर दोनों मैदानों पर मुकाबले कराने की योजना अच्छी है, लेकिन आर्थिक अनिश्चितता खिलाड़ियों के वेतन और युवा प्रशिक्षण को प्रभावित नहीं करनी चाहिए।

राष्ट्रीय टीम और क्लबों में टकराव क्यों होता है?

लंबे राष्ट्रीय शिविर कुछ समय के लिए तालमेल सुधार सकते हैं, लेकिन घरेलू प्रतियोगिता को बार-बार रोकना स्थायी उपाय नहीं है। खिलाड़ियों को पूरे वर्ष अच्छे क्लब मुकाबले चाहिए। राष्ट्रीय टीम को फीफा द्वारा तय समय में कम दिनों का, लेकिन तेज और उपयोगी शिविर मिलना चाहिए।

भारतीय आक्रमणकारी के लिए नया नियम

एआईएफएफ ने घरेलू मुकाबलों में एक भारतीय आक्रमणकारी को पूरे 90 मिनट मैदान पर रखने का प्रस्ताव मंजूर किया है। इससे भारतीय खिलाड़ियों को अधिक समय मिलेगा। लेकिन केवल मैदान पर रहना पर्याप्त नहीं है। सही प्रशिक्षण, कम उम्र की प्रतियोगिताएं और गोल के सामने बार-बार कठिन अनुभव भी जरूरी हैं।

सुधार के छह जरूरी कदम

  1. दस महीने का निश्चित घरेलू कार्यक्रम पहले से जारी हो।
  2. वेतन, क्लब खाते और युवा अकादमी के नियम सख्ती से लागू हों।
  3. राष्ट्रीय टीम को अलग-अलग एशियाई खेल शैली वाली टीमों से मुकाबले मिलें।
  4. 23 वर्ष से कम भारतीय खिलाड़ियों को मिले समय के आंकड़े सार्वजनिक हों।
  5. राज्य फुटबॉल संघों के चुनाव और प्रतियोगिताओं की वार्षिक समीक्षा हो।
  6. मुख्य प्रशिक्षक बदलने पर पूरी खेल योजना दोबारा शून्य से शुरू न हो।

राष्ट्रीय खेल महासंघ सम्मेलन 2026 में पारदर्शिता और जवाबदेही पर हुई चर्चा फुटबॉल पर भी लागू होती है।

निष्कर्ष

138वीं विश्व वरीयता, एशियाई कप से बाहर होना और घरेलू व्यवस्था में बदलाव—तीनों मिलकर संकट को वास्तविक बनाते हैं। फिर भी नया संविधान और पहले से घोषित कार्यक्रम सुधार का अवसर देते हैं। अगले एक वर्ष में असली कसौटी घोषणाएं नहीं, समय पर मुकाबले, सुरक्षित वेतन, भारतीय खिलाड़ियों को अधिक अवसर और राष्ट्रीय टीम के नतीजे होंगे।

विश्व वरीयता 11 जून 2026 की अंतिम उपलब्ध आधिकारिक फीफा सूची के अनुसार है।

Advertisement
Previous articleएशियाई खेल 2026: भारतीय हॉकी के चयन, शारीरिक तैयारी और वैकल्पिक खिलाड़ियों की परीक्षा
Next articleएशियाई खेल 2026: भारतीय निशानेबाजी टीम में दिग्गज बाहर, नए चेहरों को मौका
Harpal Singh Flora
हरपाल सिंह फ्लोरा एक वरिष्ठ खेल पत्रकार और SPORTSNET NEWS के स्पोर्ट्स एडिटर हैं, जो भारत में खेल प्रशासन (Sports Governance), नीतियों और खेल तंत्र की गहन और निष्पक्ष रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए Excellence of Journalism Award से सम्मानित किया जा चुका है। इसके साथ ही वे Newspapers Association of India (NAI) में National Organising Secretary के पद पर भी कार्यरत हैं।हरपाल सिंह फ्लोरा का फोकस सिर्फ़ मैच और नतीजों तक सीमित नहीं है, बल्कि वे खेलों के पीछे चल रहे सिस्टम, नीतियों, फेडरेशन की कार्यप्रणाली और खिलाड़ियों के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को सामने लाने का काम करते हैं।SPORTSNET NEWS के माध्यम से उनका उद्देश्य खेल पत्रकारिता को एक नई दिशा देना है—जहाँ सिर्फ खबर नहीं, बल्कि समाधान और जवाबदेही की बात हो।Harpal Singh Flora is a senior sports journalist and the Sports Editor at SPORTSNET NEWS, specializing in sports governance, policy analysis, and investigative reporting in Indian sports.He is an Excellence of Journalism Awardee and serves as the National Organising Secretary at the Newspapers Association of India (NAI).His work focuses on uncovering systemic issues in sports administration, ensuring accountability, and bringing forward policy-level discussions beyond match results.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here