नई दिल्ली: भारत वैश्विक खेल आयोजनों की मेज़बानी में अपनी भूमिका को लगातार विस्तार देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स (CWG) और 2036 ओलंपिक की महत्वाकांक्षी योजनाओं के बीच अब देश ने 2038 एशियन गेम्स की मेज़बानी के लिए भी औपचारिक रुचि जता दी है। इस संबंध में Indian Olympic Association (IOA) ने Olympic Council of Asia (OCA) को पत्र लिखकर अपनी दावेदारी प्रस्तुत की है। इस प्रस्ताव पर हाल ही में चीन के सान्या शहर में हुई OCA की एग्जीक्यूटिव बोर्ड बैठक में चर्चा की गई, जिसके बाद OCA ने मूल्यांकन टीम को भारत भेजने का निर्णय लिया है। यह टीम संभावित मेज़बानी से जुड़ी तैयारियों और अवसंरचना का आकलन करेगी।

सान्या में सक्रिय बातचीत, भारत के इरादे स्पष्ट

सूत्रों के अनुसार IOA की अध्यक्ष इस समय Sanya में मौजूद हैं, जहां OCA के बोर्ड सदस्यों के साथ उनकी महत्वपूर्ण बैठकें हुई हैं। यह संकेत देता है कि भारत इस बोली को लेकर सक्रिय रूप से कूटनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर प्रयास कर रहा है।इसी बीच, IOA के मुख्य कार्यकारी अधिकारी Raghuram Iyer ने Sportsnet News से बातचीत में इस प्रस्ताव की पुष्टि की और इसे लेकर उत्साह भी व्यक्त किया।

प्रतिस्पर्धा में दक्षिण कोरिया मजबूत, मंगोलिया की स्थिति स्पष्ट नहीं

2038 एशियन गेम्स की मेज़बानी की दौड़ में South Korea कई वर्ष पहले ही अपनी दावेदारी पेश कर चुका है और उसे एक मजबूत दावेदार माना जा रहा है। वहीं Mongolia ने भी रुचि दिखाई है, हालांकि उसके द्वारा OCA को औपचारिक प्रस्ताव भेजे जाने की पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।मौजूदा परिदृश्य में दक्षिण कोरिया इस रेस में सबसे आगे नजर आता है, जिससे भारत के लिए प्रतिस्पर्धा और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

अहमदाबाद केंद्र में, “एक शहर – कई मेगा इवेंट्स” रणनीति

भारत की रणनीति का केंद्र Ahmedabad उभरकर सामने आया है। यही शहर 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स और 2036 ओलंपिक बोली का प्रमुख आधार है, और अब 2038 एशियन गेम्स के लिए भी संभावित स्थल माना जा रहा है।यह रणनीति “One City, Multiple Mega Events” मॉडल पर आधारित है, जिसमें एक ही शहर में बड़े पैमाने पर खेल अवसंरचना विकसित कर विभिन्न अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की मेज़बानी की योजना है।

तेजी से विकसित हो रहा खेल अवसंरचना नेटवर्क

अहमदाबाद और गांधीनगर में बड़े पैमाने पर खेल अवसंरचना का विकास किया जा रहा है। SVP स्पोर्ट्स एन्क्लेव, जो लगभग 355 एकड़ में फैला है, में Narendra Modi Stadium सहित कई इंडोर एरीना, एक्वाटिक्स सेंटर और टेनिस कॉम्प्लेक्स विकसित किए जा रहे हैं।इसके अलावा कराई स्पोर्ट्स हब में एथलेटिक्स स्टेडियम, शूटिंग कॉम्प्लेक्स और अन्य सुविधाएं शामिल हैं। वडोदरा, एकता नगर और अन्य शहरों को भी इस व्यापक योजना का हिस्सा बनाया गया है।

रणनीतिक दृष्टिकोण: लागत, पुन: उपयोग और दीर्घकालिक लक्ष्य

विशेषज्ञों के अनुसार यह पहल केवल आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे दीर्घकालिक रणनीति है—पहले से अवसंरचना तैयार करनालागत को नियंत्रित रखनासंसाधनों का पुन: उपयोग सुनिश्चित करनाभविष्य के ओलंपिक आयोजन के लिए आधार बनानायदि 2036 ओलंपिक की मेज़बानी भारत को नहीं मिलती है, तो 2038 एशियन गेम्स इस निवेश को उपयोगी बनाए रखने में सहायक हो सकता है।

अतीत से सबक: क्या इस बार बदलेगी स्थिति?

1982 Asian Games के बाद बनाए गए कई स्टेडियम आज भी सीमित उपयोग और रखरखाव की समस्याओं का सामना कर रहे हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या इस बार केवल अवसंरचना पर ध्यान दिया जाएगा या खेल प्रणाली के समग्र विकास पर भी काम होगा।

विश्लेषण: क्या भारत बन रहा है Sports Powerhouse?

अगर व्यापक दृष्टिकोण से देखें, तो हाल के वर्षों में खेल क्षेत्र में सरकार के प्रयासों में स्पष्ट वृद्धि दिखाई देती है। आलोचनाओं के बावजूद, यह तथ्य भी सामने आता है कि भारत पहले कभी इतने बड़े स्तर पर लगातार कई वैश्विक खेल आयोजनों की मेज़बानी के लिए प्रयासरत नहीं रहा है।वर्तमान परिदृश्य में भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल होता दिख रहा है, जो वैश्विक खेल शक्ति (sports powerhouse) बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इटली जैसे देशों के बाद भारत उन देशों में शामिल हो सकता है, जो इतने बड़े पैमाने पर लगातार मेगा स्पोर्ट्स इवेंट्स आयोजित करने की क्षमता विकसित कर रहे हैं।

वैश्विक मंच पर बढ़ती उपस्थिति

भारत को World Athletics Indoor Championships 2028 की मेज़बानी भी मिली है, जो Bhubaneswar में आयोजित होगी। यह देश की बढ़ती वैश्विक खेल उपस्थिति का संकेत है।

निष्कर्ष

भारत अब केवल खेल प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि वैश्विक खेल आयोजनों की मेज़बानी में भी अपनी पहचान मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।हालांकि, इस रणनीति की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या यह बदलाव जमीनी स्तर तक पहुंचता है या केवल बड़े आयोजनों तक सीमित रह जाता है।

Sportsnet News का मानना है कि अब समय आ गया है—सिर्फ बड़े आयोजनों की नहीं, बल्कि मजबूत खेल प्रणाली की भी समानांतर रूप से नींव रखी जाए।

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