एशियाई खेल 2026 भारतीय हॉकी के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। पुरुष टीम अपना खिताब बचाने उतरेगी, जबकि महिला टीम स्वर्ण पदक जीतने का प्रयास करेगी। लेकिन भारत की सबसे बड़ी चुनौती केवल जापान, कोरिया या चीन नहीं होंगे। खिलाड़ियों की थकान, चोट और वैकल्पिक खिलाड़ियों की तैयारी भी परिणाम तय करेगी।
पुरुष और महिला दोनों टीमों को 15 से 30 अगस्त तक बेल्जियम और नीदरलैंड में विश्व कप खेलना है। एशियाई खेल 19 सितंबर से शुरू होंगे। दोनों बड़ी प्रतियोगिताओं के बीच लगभग तीन सप्ताह का समय है।
पुरुष टीम में अनुभव और नए चेहरों का मेल
Hockey India ने 29 जुलाई को 20 सदस्यीय पुरुष टीम घोषित की। हरमनप्रीत सिंह कप्तान हैं। मनप्रीत सिंह का लंबा अनुभव मध्य पंक्ति को मजबूती देगा।
मोहित एचएस और सूरज करकेरा गोलकीपर हैं। अमित रोहिदास, जुगराज सिंह, संजय, सुमित और यशदीप सिवाच रक्षा पंक्ति में हैं। अभिषेक, मनदीप, सुखजीत, दिलप्रीत और शिलानंद लाकड़ा पर गोल करने की जिम्मेदारी होगी।
कृष्ण पाठक के टीम में न होने से मोहित और सूरज पर दबाव बढ़ेगा। शुरुआती मुकाबलों में दोनों को पर्याप्त अवसर देना जरूरी होगा।
महिला टीम को नेशंस कप की जीत से भरोसा
महिला टीम की घोषणा 10 जुलाई को हुई। सलीमा टेटे कप्तान हैं। सविता और बिचू देवी गोलकीपर हैं। ललथांतलुआंगी और शिल्पी डबास जैसे नए रक्षकों को अच्छे प्रदर्शन का लाभ मिला है।
भारत ने जून 2026 में न्यूजीलैंड को 2-0 से हराकर महिला नेशंस कप जीता। इससे टीम का भरोसा बढ़ा है। फिर भी चीन, जापान और कोरिया के खिलाफ रक्षा और पेनल्टी कॉर्नर का प्रदर्शन बहुत महत्वपूर्ण होगा।
वैकल्पिक खिलाड़ियों की ताकत का क्या अर्थ है?
केवल 20 अच्छे नाम होना पर्याप्त नहीं है। किसी मुख्य खिलाड़ी को आराम देने के बाद भी टीम की गति, दबाव बनाने की क्षमता और रक्षा कमजोर नहीं होनी चाहिए।
- हर खिलाड़ी की दौड़ और थकान की नियमित जांच हो।
- मांसपेशियों की चोट के संकेत मिलने पर समय पर आराम दिया जाए।
- पेनल्टी कॉर्नर के लिए एक से अधिक अच्छे विकल्प तैयार हों।
- शुरुआती मुकाबलों में वैकल्पिक खिलाड़ियों को पर्याप्त समय मिले।
पुरुष टीम के हाल के नतीजे क्या बताते हैं?
भारत ने 2025-26 प्रो लीग की कमजोर शुरुआत के बाद जर्मनी और नीदरलैंड जैसी मजबूत टीमों को हराया। इससे पता चलता है कि टीम कठिन स्थिति से वापसी कर सकती है। चिंता यह है कि प्रदर्शन हर मुकाबले में एक जैसा नहीं रहा। एशियाई खेलों में कमजोर मानी जाने वाली टीम के खिलाफ भी धीमी शुरुआत महंगी पड़ सकती है।
स्वर्ण पदक से मिलेगा ओलंपिक का टिकट
अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ की योग्यता व्यवस्था के अनुसार पुरुष और महिला एशियाई खेल विजेता को लॉस एंजेलिस ओलंपिक 2028 का स्थान मिलेगा। इसलिए रजत पदक सम्मानजनक होगा, लेकिन मुख्य लक्ष्य पूरा नहीं करेगा।
पुरुष टीम के समूह में जापान, कोरिया, बांग्लादेश, श्रीलंका और इंडोनेशिया हैं। शुरुआती मुकाबलों में गोल अंतर सुधारने के साथ खिलाड़ियों को अनावश्यक थकान से बचाना होगा।
चयन में पारदर्शिता क्यों जरूरी है?
Hockey India को चयन के मुख्य आधार साफ रखने चाहिए—हाल का प्रदर्शन, शारीरिक क्षमता, चोट की स्थिति और हर स्थान के लिए जरूरी संतुलन। इससे खिलाड़ियों का भरोसा बढ़ेगा। भारत के दूसरे खेलों की संभावना एशियाई खेल 2026 पदक अनुमान में पढ़ी जा सकती है।
निष्कर्ष
पुरुष टीम अनुभवी है और महिला टीम आत्मविश्वास से भरी हुई है। दोनों स्वर्ण पदक जीत सकती हैं। लेकिन विश्व कप के बाद शरीर को आराम, शुरुआती मुकाबलों में सही बदलाव और वैकल्पिक खिलाड़ियों पर भरोसा तय करेगा कि भारत केवल पदक जीतता है या ओलंपिक का टिकट भी हासिल करता है।








