AIU की याचिका पर केंद्र और दूसरे प्रतिवादी से जवाब माँगा; 5 अक्टूबर के मंत्रालय के पत्र पर अगली सुनवाई तक अंतरिम रोक।
नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2026: विश्वविद्यालय खेलों की नई व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण न्यायिक घटनाक्रम सामने आया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने इंडियन यूनिस्पोर्ट फेडरेशन (IUSF) को मान्यता देने संबंधी खेल मंत्रालय के 5 अक्टूबर 2026 के पत्र पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (AIU) की याचिका पर न्यायमूर्ति अमित महाजन ने यह अंतरिम आदेश दिया। मामले की अगली सुनवाई 13 जनवरी 2027 को होगी।
अदालत ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई से पहले जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। केंद्र सरकार और दूसरे प्रतिवादी की ओर से उपस्थित वकीलों ने नोटिस स्वीकार किया।
यह आदेश ऐसे समय आया है जब IUSF ने अपनी पहली वार्षिक आम बैठक में प्रो. अच्युत सामंत को पहला अध्यक्ष चुना था। Sportsnet की 11 अक्टूबर की रिपोर्ट में इस निर्वाचन, मंत्रालय की मान्यता और विश्वविद्यालय खिलाड़ियों के लिए फेडरेशन की प्रस्तावित योजनाओं का विवरण प्रकाशित किया गया था।
AIU ने अदालत में क्या कहा?
आदेश में दर्ज AIU के पक्ष के अनुसार, उसे भारत में विश्वविद्यालय खेलों के प्रोत्साहन के लिए 5 मई 2008 को राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन संगठन (NSPO) की मान्यता मिली थी।
AIU ने शिकायत की कि उसकी मान्यता बिना किसी नोटिस के वापस लेने का प्रयास किया जा रहा है और 5 अक्टूबर 2026 के विवादित पत्र के जरिए एक नए फेडरेशन को मान्यता दी गई है।
यह AIU का अदालत में रखा गया पक्ष है। अदालत ने इस अंतरिम आदेश में यह अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है कि AIU की मान्यता वास्तव में वापस ली जा चुकी थी या सरकार का निर्णय अंतिम रूप से गैरकानूनी है।
चल रही प्रतियोगिताओं और खिलाड़ियों का मुद्दा उठाया
AIU की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि 1,200 से अधिक विश्वविद्यालयों के ढाई लाख से अधिक विद्यार्थी उसकी विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में भागीदारी की प्रक्रिया में हैं।
उन्होंने दलील दी कि खेल गतिविधियों में बाधा से बचने के लिए मौजूदा मान्यता जारी रहनी चाहिए। ये आँकड़े और तर्क आदेश में याचिकाकर्ता की दलील के रूप में दर्ज हैं।
AIU ने राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम, 2025 के तहत बोर्ड गठित किए जाने और खेल महासंघों को मान्यता देने की व्यवस्था का मुद्दा भी उठाया। उसके वकील ने कहा कि संबंधित व्यवस्था बनने तक मौजूदा खेल संस्थाओं की मान्यता जारी रहनी चाहिए, ताकि खिलाड़ियों की प्रतियोगिताएँ प्रभावित न हों।
FISU में देश के प्रतिनिधित्व का सवाल भी उठा
सुनवाई में अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय खेल महासंघ, यानी FISU, के नियमों के तहत एक देश से एक प्रतिनिधि संगठन की व्यवस्था का विषय भी उठाया गया।
यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मंत्रालय के 5 अक्टूबर के आदेश में FISU प्रतियोगिताओं के लिए भारतीय विश्वविद्यालय दल के चयन की जिम्मेदारी IUSF को दी गई थी। इसमें संबंधित खेल के राष्ट्रीय महासंघ का तकनीकी सहयोग लेने का प्रावधान था।
अब उसी मंत्रालय के पत्र पर अदालत की अंतरिम रोक लग गई है। इस आदेश में FISU की सदस्यता बदलने या किसी संस्था को अंतरराष्ट्रीय संबद्धता देने का अलग निर्देश नहीं है।
रोक का मतलब क्या है?
अदालत के आदेश के बिंदु 8 में स्पष्ट है कि 5 अक्टूबर 2026 का विवादित पत्र अगली सुनवाई तक स्थगित रहेगा।
इसका अर्थ है कि मंत्रालय के उस मान्यता पत्र पर फिलहाल अंतरिम रोक है। यह मान्यता को अंतिम रूप से रद्द करने का फैसला नहीं है। मामले में प्रतिवादियों के जवाब आने और आगे की सुनवाई के बाद अदालत अगला निर्णय करेगी।
आदेश में अच्युत सामंत के अध्यक्ष चुने जाने या IUSF की कार्यकारिणी के निर्वाचन को रद्द करने का कोई अलग निर्देश भी नहीं दिया गया है।
विश्वविद्यालयों और खिलाड़ियों के लिए स्पष्ट सूचना जरूरी
इस घटनाक्रम के बाद विश्वविद्यालयों और खिलाड़ियों के लिए प्रतियोगिता कैलेंडर, चयन प्रक्रिया और अंतरराष्ट्रीय भागीदारी संबंधी स्पष्ट जानकारी महत्वपूर्ण होगी।
उपलब्ध आदेश में किसी विशेष टूर्नामेंट को रद्द करने, खिलाड़ियों के प्रमाणपत्र अमान्य करने या किसी व्यक्तिगत खिलाड़ी की पात्रता बदलने का निर्देश नहीं है। ऐसे में संस्थाओं की ओर से आगे जारी होने वाले आधिकारिक निर्देशों और अदालत की अगली कार्यवाही पर ध्यान देना होगा।
मामला: Association of Indian Universities बनाम Union of India एवं अन्य, W.P.(C) 15419/2026। आदेश: 15 अक्टूबर 2026। अगली सुनवाई: 13 जनवरी 2027।
यह रिपोर्ट उपलब्ध कराई गई दो पन्नों की अदालत की आदेश-प्रति पर आधारित है। इसमें केंद्र या दूसरे प्रतिवादी की विस्तृत दलील दर्ज नहीं है। हीरो इमेज AI-सहायता से तैयार प्रतीकात्मक चित्र है।








