नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2026 | Sportsnet News विश्लेषण
एशियाई खेल 2026 में भारत चौथे स्थान पर रहा, लेकिन पदकों की संख्या पिछले संस्करण से नीचे आ गई। अब दोहा में तीसरे स्थान का लक्ष्य और अपने देश में राष्ट्रमंडल खेल 2030 की चुनौती सामने है। इस फासले को पाटने के लिए खिलाड़ियों की मेहनत के साथ महासंघों, प्रशिक्षकों, साई और मंत्रालय के काम का भी हिसाब लेना होगा।
आइची-नागोया से भारत 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य सहित 85 पदक लेकर लौटा। हांगझोऊ एशियाई खेलों के समापन पर घोषित संख्या 107 थी, जिसमें 28 स्वर्ण शामिल थे। उस समापन-समय के रिकॉर्ड से तुलना करें तो इस बार 22 पदक और सात स्वर्ण कम हैं। चौथा स्थान बरकरार रहने से पदकों की यह कमी छिप नहीं जाती। हांगझोऊ के आधिकारिक समापन रिकॉर्ड और इस बार के परिणाम यही अंतर दिखाते हैं।
साथ ही, भारतीय ओलंपिक संघ के अनुसार 85 पदक भारत की एशियाई खेलों में दूसरी सबसे बड़ी पदक संख्या है। मुक्केबाजी में तीन स्वर्ण और महिला हॉकी में लंबे इंतजार के बाद खिताब जैसी उपलब्धियां भी इसी अभियान का हिस्सा हैं। इसलिए पूरे भारतीय खेल को उसके इतिहास के सबसे बुरे दौर में बताने के बजाय यह पूछना ज्यादा जरूरी है कि पिछली उपलब्धि से आगे बढ़ने की तैयारी कहां कमजोर पड़ी।
समाचार आधार: Sportsnet Wire (News Agency) और भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) की प्रेस विज्ञप्ति। तस्वीरें: SAI Media।
एशियाई खेल 2026 की समीक्षा: एक मीराबाई पर कब तक निर्भर रहेंगे?
इसी पृष्ठभूमि में गुरुवार को राष्ट्रीय खेल महासंघों की समीक्षा बैठक हुई। साई की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने महासंघों से खिलाड़ियों की नई पीढ़ी तैयार करने और नतीजों की अधिक जिम्मेदारी लेने को कहा। बैठक में आइची-नागोया के प्रदर्शन के साथ लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 और 2030 के बड़े आयोजनों की तैयारियों पर चर्चा हुई।
मांडविया ने मीराबाई चानू का उदाहरण देते हुए कहा कि देश को उनके जैसी दस और खिलाड़ी तैयार करनी होंगी। यह बात केवल भारोत्तोलन की नहीं है। किसी भी खेल में एक स्थापित चैंपियन के बाद अगला खिलाड़ी तैयार होना चाहिए। इसके लिए प्रतिभा की पहचान से लेकर नियमित मुकाबलों, बेहतर प्रशिक्षकों और अंतरराष्ट्रीय अनुभव तक का रास्ता साफ होना जरूरी है।
खेल मंत्री ने खेल मनोवैज्ञानिकों, खेल विज्ञान विशेषज्ञों और मानसिक तैयारी पर भी जोर दिया। समीक्षा में यह देखना होगा कि प्रशिक्षण शिविर में उपलब्ध सुविधा बड़े मुकाबले तक खिलाड़ी के साथ कितनी प्रभावी ढंग से पहुंचती है। हार के बाद केवल दबाव या एकाग्रता को कारण बताना पर्याप्त नहीं; प्रतियोगिता से पहले मिले सहयोग की गुणवत्ता भी जांचनी होगी।
चार पहियों को एक दिशा में चलना होगा
खेल सचिव हरि रंजन राव ने खेल व्यवस्था की तुलना चार पहियों वाले वाहन से की—खिलाड़ी, प्रशिक्षक, राष्ट्रीय खेल महासंघ और मंत्रालय के साथ साई। उनका संदेश था कि सभी के साथ काम करने पर ही व्यवस्था आगे बढ़ सकती है। उन्होंने दोहा एशियाई खेल 2030 में तीसरे स्थान के लिए प्रयास करने को कहा।
इस तुलना का व्यावहारिक अर्थ साझा जिम्मेदारी है। महासंघ समय पर चयन और प्रतियोगिता कैलेंडर दे; प्रशिक्षक खिलाड़ी की जरूरत के अनुसार तैयारी कराएं; साई और मंत्रालय सुविधाएं, विशेषज्ञ सहयोग और मंजूर सहायता समय पर पहुंचाएं। इन कामों में देरी का बोझ अंत में खिलाड़ी पर पड़ता है। हर हार को अकेले खिलाड़ी की कमी बताकर संस्थागत समीक्षा पूरी नहीं हो सकती।
राज्य मंत्री रक्षा खडसे ने राज्य और जिला संघों के प्रभावी संचालन की बात कही। प्रतिभा खोज का रास्ता तभी मजबूत होगा जब स्थानीय प्रतियोगिता से राष्ट्रीय शिविर तक खिलाड़ी को स्पष्ट अवसर मिलें। केवल संघ का नाम दर्ज होना और उसका नियमित काम करना दो अलग बातें हैं।
बजटीय समर्थन बढ़ा, तैयारी और नतीजों का हिसाब भी चाहिए
केंद्रीय बजट 2026-27 की अनुदान मांग संख्या 102 में साई और राष्ट्रीय खेल महासंघों की सहायता, दोनों का बजटीय प्रावधान पिछले वित्त वर्ष के मूल बजट से अधिक है।
| मद | 2025-26 का बजट | 2026-27 का बजट |
|---|---|---|
| भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) | 830 करोड़ रुपये | 917.38 करोड़ रुपये |
| राष्ट्रीय खेल महासंघों को सहायता | 400 करोड़ रुपये | 425 करोड़ रुपये |
पूरे युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय का बजट 3,794.30 करोड़ से बढ़कर 4,479.88 करोड़ रुपये है; इसमें युवा कार्यक्रम भी शामिल हैं। वास्तविक व्यय की अलग तस्वीर है: मंत्रालय का शुद्ध खर्च 2024-25 में 2,710.73 करोड़ रुपये था, जबकि 2023-24 में 2,982.60 करोड़ रुपये दर्ज था। इसलिए केवल बढ़े आवंटन को बढ़ा हुआ खर्च कहना सही नहीं होगा।
जवाबदेही के सवाल दोनों तरफ हैं: मंजूर धन कितना और कब इस्तेमाल हुआ, खिलाड़ियों को क्या मिला, और तैयारी में क्या सुधार आया? बजट बढ़ने का महत्व तभी है जब उसके साथ नियमित प्रशिक्षण, सही चयन, चोट से वापसी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा की बेहतर व्यवस्था बने। मंत्रालय, साई और महासंघों की समीक्षा में इन बातों का हिसाब भी आना चाहिए।
आपसी विवाद सुलझें, व्यक्तिगत हितों से ऊपर रहे खिलाड़ी
यह चुनौती केवल प्रशिक्षण की नहीं, खेल प्रशासन की भी है। उदाहरण के लिए, 21 अप्रैल 2026 के अपने निर्णय में एफआईवीबी ने भारतीय वॉलीबॉल महासंघ के अंतरिम नेतृत्व द्वारा कानूनी और प्रशासनिक शर्तें पूरी न करने की बात कही थी। उसने अस्थायी मान्यता वापस लेकर एफआईवीबी और आईओए की संचालन समिति को अंतरिम प्रशासन की जिम्मेदारी दी थी। यह एक दिनांकित प्रशासनिक निर्णय है; इसे एशियाई खेलों में पदक घटने का प्रमाणित कारण नहीं माना जा सकता।
Sportsnet News का विश्लेषण है कि महासंघों को पद, व्यक्तिगत वर्चस्व और आपसी खींचतान से ऊपर खिलाड़ी का भविष्य रखना होगा। जहां मतभेद हों, वहां नियमों और पारदर्शी प्रक्रिया से समय पर समाधान निकले। चुनाव, मान्यता या चयन के विवाद खिलाड़ी के अभ्यास और अवसरों को प्रभावित न करें, इसकी जिम्मेदारी पदाधिकारियों और निगरानी संस्थाओं की है।
सरकार ने मई में राष्ट्रीय खेल बोर्ड और राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण से जुड़े नियम अधिसूचित किए थे। उनका उद्देश्य प्रशासनिक निगरानी और खेल विवादों का तेज, स्वतंत्र समाधान है। अब सुधार का मूल्यांकन इस आधार पर होना चाहिए कि खिलाड़ी तक उसका लाभ कितनी जल्दी पहुंचता है।
पहले दिए गए निर्देशों पर कितना अमल हुआ?
पारदर्शिता की मांग नई नहीं है। 7 अगस्त 2026 की महासंघ बैठक में भी मांडविया ने पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में चयन ट्रायल की वीडियो रिकॉर्डिंग, सालभर प्रतियोगिताएं और भारतीय प्रशिक्षकों को बेहतर अवसर देने पर जोर दिया था।
अब सवाल केवल नए निर्देश जारी करने का नहीं है। किस महासंघ ने उन बातों पर कितना काम किया? कितने खिलाड़ियों को नियमित प्रतिस्पर्धा मिली? चयन के नियम पहले सार्वजनिक हुए या आखिरी समय पर बदले? इन सवालों के जवाब के बिना अगली समीक्षा में वही चिंताएं दोहराई जा सकती हैं।
गुरुवार की बैठक में खेलो इंडिया योजना और महासंघों के तालमेल पर प्रस्तुति दी गई। टॉप्स की ओर से एशियाई खेलों और ओलंपिक की तैयारियों की समीक्षा हुई तथा महासंघों को सहायता देने संबंधी संशोधित दिशा-निर्देशों की पुस्तिका का विमोचन किया गया। इन प्रयासों का असर उनके अमल और खिलाड़ियों की तैयारी में दिखना चाहिए।

दोहा के साथ राष्ट्रमंडल खेल 2030 की दोहरी चुनौती
राव ने भारत की मेजबानी वाले राष्ट्रमंडल खेल 2030 में दिल्ली 2010 का अपना रिकॉर्ड पार करने और शीर्ष तीन में रहने की बात भी कही। अहमदाबाद की मेजबानी की पुष्टि हो चुकी है। इसलिए भारत को आयोजन की तैयारी और खिलाड़ियों के प्रदर्शन, दोनों मोर्चों पर काम करना है।
इस लक्ष्य के आकलन में खेलों का कार्यक्रम भी महत्वपूर्ण होगा। कॉमनवेल्थ स्पोर्ट की 2 अगस्त की जानकारी में कार्यक्रम को अंतिम रूप दिए जाने की प्रक्रिया और 15 से 17 खेलों की संभावना बताई गई थी। दिल्ली 2010 से पदक संख्या की तुलना करते समय शामिल खेलों और पदक स्पर्धाओं का फर्क देखना जरूरी होगा।
इस बीच लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 भी है। एक ही खिलाड़ी और प्रशिक्षक समूह पर निर्भर खेलों को क्वालिफिकेशन, चोट, आराम और प्रतियोगिताओं का तालमेल अभी से बनाना होगा। अलग-अलग आयोजनों के लिए आखिरी समय पर योजना बनाने से तैयारी का समय कम होगा।
लक्ष्य को काम में बदलने के लिए क्या होना चाहिए?
तीसरे स्थान की घोषणा को ठोस तैयारी में बदलने के लिए यह समीक्षा समयबद्ध काम तय कर सकती है। Sportsnet News के आकलन में पांच कदम जरूरी हैं:
- खेलवार समीक्षा: पदक, फाइनल और व्यक्तिगत प्रदर्शन के साथ चयन, प्रशिक्षण और सहायता की कमियों का आकलन हो। हर खेल पर एक जैसा निष्कर्ष न थोपा जाए।
- साझा कैलेंडर: चयन ट्रायल, राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं, शिविरों और अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों की योजना पहले तय हो।
- धन के इस्तेमाल की निगरानी: मंजूरी, भुगतान और खिलाड़ी को मिली सुविधा के बीच की देरी पहचानी जाए।
- विवादों का समय पर समाधान: प्रशासनिक मतभेदों के बीच खिलाड़ी की तैयारी और पात्रता सुरक्षित रहे।
- अगली पीढ़ी की तैयारी: जिला और राज्य स्तर से आने वाले प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को प्रशिक्षक, खेल विज्ञान और नियमित प्रतिस्पर्धा मिले।
भारतीय खेलों के लिए यह गंभीर आत्ममंथन का समय है। पदक जीतने वालों की उपलब्धियों का सम्मान करते हुए पूरी व्यवस्था से बेहतर काम की मांग की जा सकती है। दोहा में तीसरा स्थान और अहमदाबाद में मजबूत प्रदर्शन तभी संभव होगा, जब चारों पहियों का तालमेल बैठक के मंच से निकलकर खिलाड़ी की रोजमर्रा की तैयारी में दिखाई दे।
बैठक संबंधी समाचार और वक्तव्यों का आधार: Sportsnet Wire (News Agency) पर प्रकाशित भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) की 15 अक्टूबर 2026 की प्रेस विज्ञप्ति। अतिरिक्त संदर्भ आधिकारिक बजट, आईओए और संबंधित खेल संस्थाओं के रिकॉर्ड से। सुझाव और विश्लेषण Sportsnet News के हैं। दोनों तस्वीरों का क्रेडिट: SAI Media।








