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आज दिल्ली के ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में Sports Conclave 2026 का आयोजन किया गया जहां Sports Governance Act से लेकर Asian Games, कामनवेल्थ गेम्स और ओलिंपिक गेम्स पर सरकार ने चर्चा की। खेल मंत्री मनसुख मंडविया और रक्षा खड़से चार से पांच घंटे इस Sports Conclave 2026 में खुद मजूद रहे, इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है की सरकार खेलों में सुधार के लिए कितनी गंभीर है।
Sports Conclave 2026: खेल संघों पर कसा कानूनी शिकंजा, दी गई सख्त चेतावनी
लेकिन इस Sports Conclave 2026 का माहौल तब बदल गया जब खेल मंत्री ने सख़्ती दिखाते हुए खेल संगठनों को चेतावनी दे डाली। कड़ा रुझ अपनाते हुए खेल मंत्री मनसुख माण्डवीया ने उन सभी खेल संघटनो को बर्खास्त करने की बात कह डाली जी खेलों का इस्तेमाल अपने व्यक्तिगत हितों के लिए करते हैं। कॉन्क्लेव में ससरकार ने साफ़ शब्दों में कह दिया कि जून तक सभी खेल संगठन अपने स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट के तहत बदलाव कर लें अन्यथा उनकी मान्यता तुरंत प्रभाव से रद्द कर दी जाएगी।
अंतरराष्ट्रीय खेलों में सरकार ने कहा कि किसी ने गलत खिलाडी भेजा तो उसकी खैर नहीं। भ्रष्टाचार पर प्रहार करते हुए खेल मंत्री फेडरेशनों द्वारा अपने चहेते या पैसा लेकर खिलाड़िओं को अंतरराष्ट्रीय खेलों में भेजे जाने पर सख्त दिखाई दी। कामनवेल्थ, एशियन गेम्स, ओलम्पिक गेम्स और अन्य सभी सभी बड़े खेलों के ट्रायल की कैमरा रिकॉर्डिंग आवश्यक होगी, खेल मंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा की यदि शिकायत मिली तो मैं खुद ट्रायल करवाऊंगा। खेल मंत्री का मैसेज साफ़ था की खेल महासंघों द्वारा दुकानें नहीं चलेंगी।
Sports Conclave 2026 में सरकार ने ‘स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट’ और पारदर्शिता पर दिया ज़ोर
आपको याद होगा की नए स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट में खेल मंत्रालय नेशनल स्पोर्ट्स बोर्ड के गठन का प्रावधान रखा है। सरकार ने फिर से दोहराया कि यह बोर्ड सभी खेल संघों और महासंघों पर नज़र रखेगा। कोई महासंघ बिना किसी कारण किसी भी राज्य संघ को नहीं निकाल पाएगा, उसे हटाने के लिए फेडरेशन के पास वाजिब कारण होना ज़रूरी होगा यानी फेडरेशन का अध्यक्ष या सचिव अब मनमानी नहीं कर पाएंगे। इस से ज़ाहिर है की सरकार खेल महासंघों में गुटबाजी और खेल संघों की लड़ाई को लेकर काफी परेशान है।
मतलब साफ़ है कि फेडरशनों की दादागिरी नहीं चलेगी, धांधली नहीं चलेगी, क़ायदे कानून से फेडरेशन नहीं चलाई तो ख़ैर नहीं। खेल मंत्रालय की इस सख्ती से आपसी लड़ाई पर थोड़ा अंकुश तो ज़रूर लगेगा।
ऐसा देखा गया है कि अंतरराष्ट्रीय खेलों में अपने रिश्तेदारों को भेजे जाने की प्रथा सी बन गई है, कहीं अध्यक्ष की बीवी जा रही है तो कहीं सचिव के रिश्तेदार, जिसकी वजह से पैसा सही जगह इस्तेमाल नहीं हो पाटा। खेल मंत्रालय ने साफ़ कर दिया की अंतरराष्ट्रीय खेलों में केवल वही व्यक्ति जाएंगे जिनकी ज़रूरत है, खेल संगठनों द्वारा चाचा, मामा, भांजा, दोस्त या कोई चहेता भेजे जाने पर सरकार ने सख्त होती दिखी। इस से भी भाई भतीजावाद पर रोक लगने की उम्मीद दिखाई दी।
BIG BOSS सब देख रहा है: सभी खेल संघों को एक आईटी जानकार भी दिए जाने की बात कही ताकि फेडरेशन कार्यालय को सुचारु रूप से चलाया जा सके। लेकिन दबी जुबां में कुछ खेल संगठनों ने इसे खेल मंत्रालय का जसस बिठाए जाने जैसा करार दिया। खेल संगठनों को लगता है की इस से उनकी गोपनीयता ख़तम हो जाएगी, खेल मंत्रालय द्वारा दिया गया आईटी जानकार सभी खबरें खेल मंत्रालय तक पहुंचा सकता है।
सरकार डोपिंग को लेकर भी काफी परेशान दिख रही है। खेलों में मैडल लेकर तो नहीं लेकिन भारत लगातार विश्व डोपिंग में अव्वल आ रहा है। हाल ही में भारत में हुए WADA CONCLAVE में वडा अध्यक्ष नै इस पर गंभीर चिंता ज़ाहिर की थी। सरकार ने इस पर कड़े नियम बनाने, सीबीआई, ई डी, एंटी नारकोटिक्स बयूरो को इस मुहीम में शामिल कर सन्देश साफ़ दिया की यह हरगिज़ बर्दाश नहीं होगा।
आज Sports Conclave 2026 में इस बात को दोहराते हुए खेल मंत्रालय ने कड़ा जुर्माना और जैक की सजा की बात दोहराई। जल्द ही डोपिंग पर भी नई नीति देखने को मिलेगी।
इस Sports Conclave 2026 में लगभग सभी 37 खेल संगठनों के अध्यक्ष और सचिव मौजूद रहे, सभी को स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट 2025 की किताब बांटी गई ताकि सभी खेल महासंघ नए स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट का अनुपालन करें और किसी पास कोई बहाना न हो।
सरकार की मंशा है ऐसे Sports Conclave 2026 की तरह हर तीन महीने में करवाए जायेंगे। इसी तरह की जानकारियां या कहें की दिशा निर्देश दिए जाते रहेंगे।
सरकार की मंशा बिलकुल साफ़ है, काम हमारे मुताबिक़ होगा अन्यथा आपको जाना होगा।
National Sports Conclave 2026 के अन्य मुख्य बिंदु
- National Sports Federation Conclave 2026 में 37 राष्ट्रीय खेल महासंघों ने भाग लिया।
- बैठक में कॉमनवेल्थ गेम्स 2026, एशियन गेम्स 2026 और ओलंपिक 2028 की तैयारियों पर फोकस रहा।
- खेल मंत्री Mansukh Mandaviya ने कहा कि यह सम्मेलन भारत की वैश्विक खेल तैयारी का महत्वपूर्ण कदम है।
- सरकार ने वैज्ञानिक प्रशिक्षण, इंफ्रास्ट्रक्चर और दीर्घकालिक योजना पर जोर दिया।
- डोपिंग के खिलाफ सख्त कार्रवाई और जागरूकता बढ़ाने की बात कही गई।
- खेल महासंघों में पारदर्शिता, जवाबदेही और समय पर चुनाव सुनिश्चित करने पर जोर।
- खिलाड़ियों के लिए अधिक अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर और निष्पक्ष चयन प्रणाली की दिशा तय की गई।
- Khelo India, Fit India और Khelo Bharat Mission को खेल विकास का आधार बताया गया।
- National Sports Governance Act 2025 के नियम और गाइडलाइन जारी किए गए।
- राज्य मंत्री Raksha Khadse ने कहा कि भारत की प्रगति performance और science-based approach पर निर्भर करेगी।
- सरकार का लक्ष्य भारत को global sporting powerhouse बनाना है।
खेल प्रशासन में लंबे समय से पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में सरकार की यह सख्ती यदि प्रभावी रूप से लागू होती है, तो यह भारतीय खेल प्रणाली में बड़े बदलाव की शुरुआत साबित हो सकती है।
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