भारतीय शीतकालीन खेल खर्च समीक्षा का पहला तथ्य चिंता पैदा करता है। मिलानो-कोर्तिना शीतकालीन ओलंपिक 2026 में भारत के केवल दो खिलाड़ी थे—अल्पाइन स्की खिलाड़ी आरिफ खान और क्रॉस-कंट्री स्की खिलाड़ी स्टैनजिन लुंडुप। भारत को कोई पदक नहीं मिला।
दूसरी ओर खेलो इंडिया शीतकालीन खेलों में सैकड़ों खिलाड़ी भाग ले रहे हैं। इसलिए मुख्य प्रश्न यह है कि घरेलू भागीदारी अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों में क्यों नहीं बदल रही।
मिलानो-कोर्तिना ने क्या बताया?
दो खिलाड़ियों का दल बताता है कि भारत के पास ओलंपिक योग्यता के पास पहुंचने वाले खिलाड़ियों की संख्या बहुत कम है। आरिफ पहले भी ओलंपिक खेल चुके थे, जबकि स्टैनजिन का यह पहला ओलंपिक था।
खेल मंत्रालय की फरवरी 2026 की जानकारी दोनों खिलाड़ियों की भागीदारी की पुष्टि करती है। ओलंपिक स्तर तक पहुंचने के लिए पूरे वर्ष बर्फ या बर्फीले मैदान पर अभ्यास, विदेशी प्रतियोगिताएं और विशेष प्रशिक्षक जरूरी हैं।
घरेलू भागीदारी कितनी बढ़ी?
खेलो इंडिया शीतकालीन खेल 2026 का लद्दाख चरण 20 से 26 जनवरी तक हुआ। इसमें आइस हॉकी, तेज बर्फ दौड़ और पहली बार कलात्मक बर्फ दौड़ सहित 472 खिलाड़ियों ने भाग लिया। गुलमर्ग चरण में अल्पाइन स्की, नॉर्डिक स्की, स्की पर्वतारोहण और स्नोबोर्डिंग में लगभग 400 खिलाड़ी आने थे।
भारतीय महिला आइस हॉकी टीम ने 2025 एशिया कप में कांस्य जीता। तारा प्रसाद ने कलात्मक बर्फ दौड़ की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीते। ये अच्छे संकेत हैं, लेकिन अगला कदम नियमित बड़ी प्रतियोगिताओं में भागीदारी है।
सरकारी सहायता में क्या बदला?
एशियाई शीतकालीन खेल 2025 के लिए सरकारी मंजूरी में 59 खिलाड़ी और 29 अधिकारी शामिल थे। पहली बार अल्पाइन स्की, क्रॉस-कंट्री स्की, कलात्मक बर्फ दौड़ और तेज बर्फ दौड़ के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय खेल महासंघ सहायता योजना से पूरा वित्तीय सहयोग दिया गया।
यह महत्वपूर्ण सुधार है। फिर भी सार्वजनिक कागजों में हर शीतकालीन खेल, खिलाड़ी, शिविर और विदेशी यात्रा पर हुए वास्तविक खर्च का एक साथ विवरण आसानी से उपलब्ध नहीं है। इसलिए बिना पूरे आंकड़ों के यह कहना सही नहीं होगा कि पर्याप्त पैसा खर्च हुआ या बिल्कुल खर्च नहीं हुआ।
आयोजन खर्च और खिलाड़ी प्रशिक्षण अलग हैं
भारतीय खेल प्राधिकरण की बैठक के विवरण में खेलो इंडिया शीतकालीन खेलों के समारोह, मैदान और अस्थायी सुविधाओं का अनुमान दिया गया है। प्रतियोगिता कराना जरूरी है, लेकिन चार दिन के आयोजन पर हुआ खर्च पूरे वर्ष के खिलाड़ी प्रशिक्षण के बराबर नहीं है।
भारत की मुख्य कठिनाइयां
- हिमालय में बर्फ का मौसम सीमित रहता है।
- पूरे वर्ष चलने वाले अच्छे बंद बर्फ मैदान बहुत कम हैं।
- स्की, जूते, मरम्मत और विदेशी यात्रा बहुत महंगी है।
- ओलंपिक योग्यता के लिए लगातार विदेशी प्रतियोगिताएं खेलनी पड़ती हैं।
- बर्फ और हिम वाले खेल अलग-अलग संघों में हैं, इसलिए बेहतर तालमेल चाहिए।
अगले ओलंपिक चक्र में क्या मापा जाए?
- हर शीतकालीन खेल में राष्ट्रीय दल के खिलाड़ियों की संख्या।
- हर खिलाड़ी पर सालाना सरकारी और निजी सहायता।
- विदेश में अभ्यास के दिन और प्रतियोगिताओं की संख्या।
- विशेष प्रशिक्षकों और उपकरण विशेषज्ञों की उपलब्धता।
- चोट, उपकरण और बीमा की सहायता।
- खेलो इंडिया पदक विजेताओं में से कितने अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे।
- 2030 शीतकालीन ओलंपिक के लिए हर वर्ष का साफ लक्ष्य।
खेलो इंडिया को आगे की राह से कैसे जोड़ें?
खेलो इंडिया खर्च और परिणाम की हमारी समीक्षा का निष्कर्ष यहां भी लागू होता है। खिलाड़ियों की संख्या शुरुआत है; अंतरराष्ट्रीय योग्यता असली नतीजा है। शीर्ष घरेलू खिलाड़ियों को राष्ट्रीय शिविर, समान शारीरिक जांच और कम से कम दो वर्ष की विदेशी प्रतियोगिता योजना मिलनी चाहिए।
गुलमर्ग, औली और लद्दाख प्राकृतिक केंद्र हैं। सेना, आईटीबीपी, राज्य सरकार, पर्यटन संस्थाओं, स्कूलों और निजी अकादमियों को मिलकर सुविधाएं पूरे वर्ष चलानी होंगी।
निष्कर्ष
भारत ने घरेलू भागीदारी और सरकारी सहायता में सुधार किया है। फिर भी केवल दो खिलाड़ियों का ओलंपिक दल बताता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की श्रृंखला अभी कमजोर है। अब जरूरत खिलाड़ी के अनुसार साफ खर्च, पूरे वर्ष की सुविधाओं और योग्यता से जुड़ी विदेशी प्रतियोगिताओं की है।








