अच्युत सामंत IUSF के पहले अध्यक्ष — सामंत की तस्वीर और इंडियन यूनिस्पोर्ट फेडरेशन लोगो वाला शीर्षक चित्र
अच्युत सामंत बने IUSF के पहले अध्यक्ष। स्रोत तस्वीर और दिए गए लोगो से AI-सहायता से तैयार शीर्षक डिजाइन।

नई दिल्ली, 11 अक्टूबर 2026: इंडियन यूनिस्पोर्ट फेडरेशन (IUSF) के पहले अध्यक्ष के रूप में प्रो. (डॉ.) अच्युत सामंत का सर्वसम्मति से चुना जाना भारतीय विश्वविद्यालय खेलों के लिए उम्मीद जगाने वाला घटनाक्रम है। KIIT और KISS के संस्थापक तथा शिक्षा और खेलों से जुड़े परिचित नाम सामंत के नेतृत्व में विश्वविद्यालय खिलाड़ियों के लिए बेहतर सुविधाओं और अधिक व्यवस्थित खेल व्यवस्था की अपेक्षा बढ़ी है।

फेडरेशन के प्रेस नोट के अनुसार, रविवार को नई दिल्ली में आयोजित पहली वार्षिक आम बैठक में उनका निर्वाचन हुआ। बैठक में 27 राज्य और क्षेत्रीय विश्वविद्यालय खेल संघों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति दर्ज की गई।

IUSF की पहली वार्षिक आम बैठक में अच्युत सामंत और उपस्थित प्रतिनिधियों की समूह तस्वीर
नई दिल्ली में IUSF की पहली वार्षिक आम बैठक में अच्युत सामंत और उपस्थित प्रतिनिधि। फोटो: उपलब्ध कराई गई तस्वीर।

IUSF को मंत्रालय की मान्यता से मिली महत्वपूर्ण जिम्मेदारी

जैसा कि Sportsnet ने अपने पिछले वीडियो में बताया था, केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय ने 5 अक्टूबर 2026 से IUSF को विश्वविद्यालय खेलों के लिए राष्ट्रीय खेल महासंघ यानी NSF के रूप में अस्थायी मान्यता दी है। मंत्रालय का आदेश विश्वविद्यालय खेलों के विकास और प्रोत्साहन में फेडरेशन को महत्वपूर्ण भूमिका देता है।

आदेश के बिंदु 3(o) में स्पष्ट है कि FISU प्रतियोगिताओं के लिए भारतीय विश्वविद्यालय दल का चयन IUSF करेगा, जिसमें संबंधित खेल के राष्ट्रीय महासंघ से उचित तकनीकी सहयोग लिया जाएगा। संबंधित राष्ट्रीय खेल महासंघ अपने खेल का तकनीकी प्राधिकरण बना रहेगा। IUSF उसके साथ प्रशिक्षण, निर्णायकों, तकनीकी मानकों, प्रतिभा पहचान और बेहतर प्रदर्शन के लिए सहयोग की व्यवस्था कर सकता है।

मंत्रालय ने प्रतियोगिताओं, अग्रिम खेल कैलेंडर, चयन प्रक्रिया और खिलाड़ियों की शिकायत निवारण व्यवस्था के लिए सरकारी दिशानिर्देशों का पालन भी अनिवार्य किया है। हालांकि, इस आदेश में सभी ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी टूर्नामेंट तत्काल IUSF को हस्तांतरित करने का स्पष्ट निर्देश नहीं है।

इस बदलाव की पृष्ठभूमि जानने के लिए पढ़ें: IUSF की मान्यता और विश्वविद्यालय खेलों की नई व्यवस्था पर Sportsnet की पिछली रिपोर्ट। मंत्रालय का मान्यता संबंधी विवरण आधिकारिक समाचार अभिलेख में उपलब्ध है।

अच्युत सामंत के नेतृत्व से क्यों बढ़ी उम्मीद?

किसी संगठन के अध्यक्ष का अनुभव और कार्यशैली उसकी संभावित दिशा का संकेत देते हैं। अच्युत सामंत का शिक्षा के साथ खेलों को आगे बढ़ाने का अनुभव इस लिहाज से IUSF की एक महत्वपूर्ण ताकत हो सकता है।

प्रेस नोट के मुताबिक, KIIT और KISS के खिलाड़ियों ने ओलंपिक, एशियाई खेलों, राष्ट्रमंडल खेलों और विश्व विश्वविद्यालय खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। संस्थानों में प्रशिक्षण, खेल विज्ञान, पोषण, पुनर्वास और चिकित्सा सहायता की सुविधाएं उपलब्ध कराने का अनुभव व्यापक विश्वविद्यालय खेल व्यवस्था के लिए उपयोगी हो सकता है।

अध्यक्ष चुने जाने के बाद सामंत ने कहा कि प्रत्येक प्रतिभाशाली खिलाड़ी को उसकी पृष्ठभूमि या संस्थान से परे प्रतिस्पर्धा और आगे बढ़ने का समान अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालयों, खिलाड़ियों और सदस्य संघों के सहयोग से काम करने की बात कही तथा केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया और मंत्रालय के प्रति आभार व्यक्त किया।

इस नेतृत्व से उम्मीद जरूर जगी है। अब उनके अनुभव का लाभ देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और अलग-अलग आर्थिक पृष्ठभूमि से आने वाले खिलाड़ियों तक पहुंचाना महत्वपूर्ण होगा।

खिलाड़ियों से व्यक्तिगत भागीदारी शुल्क नहीं लेने की प्रतिबद्धता

IUSF ने अपनी प्रस्तावित प्रतिबद्धताओं में सरकारी और निजी संस्थानों के लिए समान रूप से ₹50,000 वार्षिक सदस्यता शुल्क रखा है। खिलाड़ियों से व्यक्तिगत भागीदारी शुल्क नहीं लेने की बात भी कही गई है।

प्रेस नोट के अनुसार, राज्य सरकारों, राज्य खेल संघों या विश्वविद्यालयों से प्राप्त भागीदारी शुल्क का उपयोग खिलाड़ियों के हित और कल्याण के लिए किया जाएगा। विश्वविद्यालयों को सहायता देने के लिए खेल प्रदर्शन और वास्तविक जरूरत जैसे स्पष्ट मानदंड अपनाने का प्रस्ताव है।

इन प्रतिबद्धताओं का प्रभावी क्रियान्वयन खिलाड़ियों पर आर्थिक बोझ घटाने और अधिक प्रतिभाओं को प्रतियोगिताओं तक पहुंचाने में मदद कर सकता है।

प्रशिक्षण, निष्पक्ष चयन और पारदर्शिता पर जोर

फेडरेशन ने गुणवत्तापूर्ण कोचिंग, खेल विज्ञान, पोषण, चोटों से बचाव और पुनर्वास सुविधाओं तक खिलाड़ियों की पहुंच बढ़ाने की योजना बताई है। प्रमुख खिलाड़ियों के लिए शैक्षणिक और आर्थिक सहायता तथा नियमित विश्वविद्यालय लीग और प्रतियोगिताएं भी उसकी प्राथमिकताओं में शामिल हैं।

पात्रता नियम, चयन मानदंड और प्रतियोगिता कैलेंडर पहले से प्रकाशित करने, खेलवार स्वतंत्र चयन पैनल बनाने तथा स्पष्ट अपील और शिकायत निवारण प्रक्रिया उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है। ऑडिट किए गए वार्षिक खाते और सदस्यता तथा पंजीकरण शुल्क के उपयोग का विवरण सार्वजनिक करने की बात भी कही गई है।

मंत्रालय के आदेश में भी खिलाड़ी केंद्रित प्रशिक्षण और विकास व्यवस्था बनाने की शर्त है। इसके साथ महिला खिलाड़ियों की सुरक्षा, उम्र संबंधी धोखाधड़ी की रोकथाम, डोपिंग नियंत्रण और सूचना के अधिकार से जुड़े निर्देशों का पालन आवश्यक किया गया है। बेहतर सुविधाएं और जवाबदेही, दोनों नई व्यवस्था के महत्वपूर्ण आधार हैं।

छह महीने में अनुपालन और अंतरराष्ट्रीय संबद्धता

मंत्रालय ने IUSF को अपने संविधान, नियमों, संस्थागत प्रक्रियाओं और संचालन को राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम, 2025 तथा संबंधित नियमों के अनुरूप बनाने के लिए छह महीने का समय दिया है। संबंधित अंतरराष्ट्रीय महासंघ से संबद्धता भी इसी अवधि में प्राप्त करनी है। विश्वविद्यालय खेलों के अंतरराष्ट्रीय निकाय FISU से संबद्धता हासिल करना इस दिशा में महत्वपूर्ण होगा।

5 अक्टूबर 2026 से छह महीने की अवधि अप्रैल 2027 में पूरी होगी। इसलिए फेडरेशन को आवश्यक अनुपालन और अगले खेल सत्र की तैयारी पर अभी से काम करना होगा। सरकारी मान्यता मिलने से अंतरराष्ट्रीय महासंघ की संबद्धता स्वतः प्राप्त नहीं होती।

AIU का स्पष्ट रुख सामने आना भी जरूरी

IUSF को मिली जिम्मेदारी, विशेषकर FISU प्रतियोगिताओं के लिए भारतीय विश्वविद्यालय दल के चयन की भूमिका, आदेश में स्पष्ट है। इसलिए इस विषय को पूरी तरह अनिर्णीत बताना उचित नहीं होगा।

हालांकि, इस बदलाव पर एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (AIU) का स्पष्ट सार्वजनिक रुख सामने आना विश्वविद्यालयों और खिलाड़ियों के लिए उपयोगी होगा। आठ अक्टूबर की PTI रिपोर्ट के अनुसार, इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया के लिए किए गए संपर्क का AIU की महासचिव ने जवाब नहीं दिया था। यह उस समय प्रतिक्रिया नहीं मिलने का विवरण है; इससे वर्तमान में कोई बयान न होने या निर्णय का विरोध किए जाने का निष्कर्ष नहीं निकलता।

AIU की ओर से स्पष्ट जानकारी मिलने पर यह समझना आसान होगा कि नई व्यवस्था के साथ उसका सहयोग किस रूप में आगे बढ़ेगा। खिलाड़ियों के हित में इस बदलाव के दौरान समय पर सूचना और संस्थागत समन्वय जरूरी है।

मंत्रालय के इस आदेश में AIU की प्रतियोगिताओं को रोकने या उसकी मान्यता वापस लेने का निर्देश नहीं है। इसलिए केवल IUSF की मान्यता के आधार पर मौजूदा अंतर-विश्वविद्यालय टूर्नामेंट बंद होने की आशंका नहीं निकाली जानी चाहिए।

IUSF की नई कार्यकारिणी

प्रेस नोट में दर्ज नेतृत्व टीम के अनुसार, प्रो. (डॉ.) राजेश त्रिपाठी, डॉ. यू. वी. शंकर, प्रो. (डॉ.) कल्पना शर्मा और डॉ. कंवर मंदीप सिंह उपाध्यक्ष हैं। डॉ. बिनु जॉर्ज वर्गीज महासचिव तथा डॉ. भास्कर शुक्ला कोषाध्यक्ष हैं। डॉ. कविता खोलगड़े और डॉ. कौकब अजीम संयुक्त सचिव हैं।

कार्यकारिणी सदस्यों में डॉ. वी. महादेवन, डॉ. अमीनुल हक, अर्जुन पुरस्कार विजेता डोला बनर्जी, सागर जोशी, पद्मश्री अंजू बॉबी जॉर्ज और राजीव तोमर शामिल हैं। प्रतिष्ठित खिलाड़ियों का कार्यकारिणी में शामिल होना भी सकारात्मक संकेत है।

उम्मीदों को मैदान पर उतारने का अवसर

अच्युत सामंत के नेतृत्व में IUSF के सामने विश्वविद्यालय खेलों को अधिक सुलभ, व्यवस्थित और खिलाड़ी केंद्रित बनाने का अवसर है। इसकी शुरुआत उम्मीद जगाती है। अब सफलता का पैमाना होगा—खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण मिले, चयन निष्पक्ष हो, प्रतियोगिताएं समय पर हों और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का रास्ता स्पष्ट बने।

स्रोत: खेल मंत्रालय का 5 अक्टूबर 2026 का अस्थायी मान्यता आदेश; IUSF की पहली वार्षिक आम बैठक का 11 अक्टूबर 2026 का प्रेस नोट; AIU की प्रतिक्रिया संबंधी 8 अक्टूबर की PTI रिपोर्ट। फीचर्ड चित्र: उपलब्ध कराई गई सामंत की तस्वीर और IUSF लोगो पर आधारित AI-सहायता से तैयार शीर्षक डिजाइन; यह बैठक का वास्तविक फोटो नहीं है।

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Harpal Singh Flora
हरपाल सिंह फ्लोरा एक वरिष्ठ खेल पत्रकार और SPORTSNET NEWS के स्पोर्ट्स एडिटर हैं, जो भारत में खेल प्रशासन (Sports Governance), नीतियों और खेल तंत्र की गहन और निष्पक्ष रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए Excellence of Journalism Award से सम्मानित किया जा चुका है। इसके साथ ही वे Newspapers Association of India (NAI) में National Organising Secretary के पद पर भी कार्यरत हैं।हरपाल सिंह फ्लोरा का फोकस सिर्फ़ मैच और नतीजों तक सीमित नहीं है, बल्कि वे खेलों के पीछे चल रहे सिस्टम, नीतियों, फेडरेशन की कार्यप्रणाली और खिलाड़ियों के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को सामने लाने का काम करते हैं।SPORTSNET NEWS के माध्यम से उनका उद्देश्य खेल पत्रकारिता को एक नई दिशा देना है—जहाँ सिर्फ खबर नहीं, बल्कि समाधान और जवाबदेही की बात हो।Harpal Singh Flora is a senior sports journalist and the Sports Editor at SPORTSNET NEWS, specializing in sports governance, policy analysis, and investigative reporting in Indian sports.He is an Excellence of Journalism Awardee and serves as the National Organising Secretary at the Newspapers Association of India (NAI).His work focuses on uncovering systemic issues in sports administration, ensuring accountability, and bringing forward policy-level discussions beyond match results.

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