योग और योगासन मान्यता विवाद: दिल्ली हाई कोर्ट ने MYAS से हलफनामा माँगा; YFI को सीमित अंतरिम राहत — प्रतीकात्मक चित्र
योग/योगासन मान्यता विवाद में हाई कोर्ट ने मंत्रालय से चार सप्ताह में हलफनामा माँगा है। प्रतीकात्मक संपादकीय चित्र।

नई दिल्ली, 3 नवंबर 2026: हाई कोर्ट के आदेश में “Yoga/Yogasana”, लेकिन खेल मंत्रालय की आवेदन सूचना में केवल “Yogasana”। “Yoga” शब्द के इसी अंतर ने राष्ट्रीय खेल महासंघ की मान्यता का विवाद फिर दिल्ली हाई कोर्ट पहुँचा दिया है। अदालत ने अब मंत्रालय को चार सप्ताह में संबंधित विषय पर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।

न्यायमूर्ति अमित महाजन ने Yoga Federation of India बनाम Union of India, W.P.(C) 16133/2026 में योग फेडरेशन ऑफ इंडिया (YFI) को अंतरिम राहत देते हुए कहा कि उसका आवेदन केवल इस कारण खारिज नहीं किया जाए कि उसने “Yoga” के राष्ट्रीय खेल महासंघ के रूप में मान्यता माँगी है। अगली सुनवाई 14 जनवरी 2027 को होगी।

अदालत का निर्देश: केवल “योग” के आधार पर आवेदन खारिज न हो

आदेश के अनुच्छेद 4 में अदालत ने स्पष्ट किया कि 9 जुलाई 2026 के फैसले में सभी पात्र संस्थाओं से “Yoga/Yogasana” के लिए आवेदन आमंत्रित करने का विशिष्ट निर्देश था। इसी संबंध में केंद्र सरकार को चार सप्ताह के भीतर उचित हलफनामा दाखिल करना है।

अनुच्छेद 5 में YFI के आवेदन को सीमित अंतरिम सुरक्षा दी गई है। लिखित आदेश में पूरी मान्यता प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाई गई है। अदालत ने अभी YFI को मान्यता भी नहीं दी है और न ही इस आदेश में योग तथा योगासन को हर दृष्टि से समान घोषित करने का अंतिम निष्कर्ष दिया है।

आदेश में “Yoga/Yogasana”, सूचना में सिर्फ “Yogasana”

विवाद की जड़ मंत्रालय की 3 सितंबर 2026 की Public Notice है। इसमें 9 जुलाई के फैसले के अनुपालन का उल्लेख करते हुए “Yogasana” के लिए राष्ट्रीय खेल महासंघ की मान्यता के आवेदन माँगे गए थे। अंतिम तारीख 17 सितंबर 2026, शाम 5:30 बजे थी।

आज के आदेश में दर्ज है कि YFI ने 17 सितंबर 2026 को आवेदन किया था। फेडरेशन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राहुल मेहरा ने दलील दी कि पहले फैसले में “Yoga/Yogasana” लिखा होने के बावजूद सूचना में संभवतः अनजाने में केवल “Yogasana” का उल्लेख हुआ। फेडरेशन को आशंका है कि इसी अंतर के कारण उसका आवेदन खारिज हो सकता है। यह आशंका और संभावित चूक की बात याचिकाकर्ता की दलील के रूप में आदेश में दर्ज है।

पहले की मान्यता रद्द हुई, किसी दूसरे महासंघ को अपने आप अधिकार नहीं मिला

इससे पहले 9 जुलाई 2026 को W.P.(C) 20/2021 में दिल्ली हाई कोर्ट ने योगासन भारत, पूर्व नाम National Yogasana Sports Federation, के पक्ष में जारी 27 नवंबर 2020 की मान्यता, 19 अक्टूबर 2021 का speaking order और 2022 से 2025 के संबंधित renewal letters रद्द किए थे। फैसले में Sports Code की अनिवार्य पात्रता शर्तों तथा मंत्रालय के स्वतंत्र मूल्यांकन में कमियाँ पाई गई थीं।

अदालत ने नई और कानूनसम्मत मान्यता प्रक्रिया का निर्देश दिया था। साथ ही स्पष्ट किया था कि YFI को राष्ट्रीय खेल महासंघ घोषित नहीं किया जा रहा और उसे कोई स्वतः प्राथमिकता या लाभ नहीं मिलेगा। मान्यता का निर्णय नई प्रक्रिया में खेल मंत्रालय को करना है। पहले की मान्यता लागू रहने के दौरान खिलाड़ियों और अन्य व्यक्तिगत प्रतिभागियों की उपलब्धियाँ सुरक्षित रखी गई थीं।

फॉर्म में भी सवाल: एक खेल की कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ हों तो?

मंत्रालय की सूचना के साथ संलग्न 30 प्रश्नों वाला आवेदन प्रपत्र खेल-विधा, नियम, प्रतियोगिताओं और संबद्धताओं का विवरण माँगता है। प्रश्न 22 में उसी खेल को बढ़ावा देने वाले किसी अन्य राष्ट्रीय महासंघ की जानकारी माँगी गई है। प्रश्न 24 में एक ही खेल की एक से अधिक अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ होने पर उनका विवरण और कारण बताने को कहा गया है।

इससे यह प्रश्न महत्वपूर्ण हो जाता है कि मंत्रालय योग प्रतियोगिताओं के अनुभव और योग से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय संबद्धताओं को “Yogasana” की मान्यता प्रक्रिया में किस आधार पर परखेगा। हालांकि केवल इन प्रश्नों से किसी आवेदक की पात्रता या अपात्रता तय नहीं होती।

अब मंत्रालय के जवाब से क्या साफ होगा?

योग और योगासन का नाम इस प्रक्रिया में किस अर्थ और दायरे में इस्तेमाल किया जा रहा है? क्या नाम के अंतर से किसी पात्र संस्था के अनुभव और संबद्धताओं के मूल्यांकन पर असर पड़ेगा? अदालत के पहले निर्देश और मंत्रालय की सूचना के बीच शब्दों का अंतर कैसे स्पष्ट किया जाएगा?

इन प्रश्नों के बीच फिलहाल आदेश का ठोस असर साफ है: YFI का आवेदन केवल “Yoga” के लिए होने के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता। मान्यता किसे मिलेगी, इसका अंतिम निर्णय अभी बाकी है।


दस्तावेज़: यह रिपोर्ट 3 नवंबर 2026 के दिल्ली हाई कोर्ट आदेश (विशेषतः अनुच्छेद 2–6), 9 जुलाई 2026 के फैसले और 3 सितंबर 2026 की मंत्रालय की Public Notice व संलग्न आवेदन प्रपत्र पर आधारित है।

ऊपर दिए दस्तावेज़ों की उपलब्ध प्रतियाँ पाठकों के संदर्भ के लिए संलग्न हैं। हीरो इमेज प्रतीकात्मक संपादकीय चित्र है।

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Harpal Singh Flora
हरपाल सिंह फ्लोरा एक वरिष्ठ खेल पत्रकार और SPORTSNET NEWS के स्पोर्ट्स एडिटर हैं, जो भारत में खेल प्रशासन (Sports Governance), नीतियों और खेल तंत्र की गहन और निष्पक्ष रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए Excellence of Journalism Award से सम्मानित किया जा चुका है। इसके साथ ही वे Newspapers Association of India (NAI) में National Organising Secretary के पद पर भी कार्यरत हैं।हरपाल सिंह फ्लोरा का फोकस सिर्फ़ मैच और नतीजों तक सीमित नहीं है, बल्कि वे खेलों के पीछे चल रहे सिस्टम, नीतियों, फेडरेशन की कार्यप्रणाली और खिलाड़ियों के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को सामने लाने का काम करते हैं।SPORTSNET NEWS के माध्यम से उनका उद्देश्य खेल पत्रकारिता को एक नई दिशा देना है—जहाँ सिर्फ खबर नहीं, बल्कि समाधान और जवाबदेही की बात हो।Harpal Singh Flora is a senior sports journalist and the Sports Editor at SPORTSNET NEWS, specializing in sports governance, policy analysis, and investigative reporting in Indian sports.He is an Excellence of Journalism Awardee and serves as the National Organising Secretary at the Newspapers Association of India (NAI).His work focuses on uncovering systemic issues in sports administration, ensuring accountability, and bringing forward policy-level discussions beyond match results.

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