
भारतीय खेल प्रशासन एक बार फिर विवादों के घेरे में है। इस बार मामला जुड़ा है Ski and Snowboard India से, जिसे लेकर Indian Olympic Association (IOA) और International Ski and Snowboard Federation (FIS) के बीच हुई एक घटना ने खेल जगत में हलचल मचा दी है। सवाल सिर्फ एक winter sports federation की सदस्यता का नहीं है — यह सवाल है भारतीय खेल प्रशासन की विश्वसनीयता, न्यायिक आदेशों के सम्मान और IOA की जवाबदेही का।
FIS की World AGM में क्या हुआ?
10-11 जून को आयोजित FIS की World AGM और International Congress में भारत से जुड़ा एक अहम मुद्दा सामने आया। बताया जा रहा है कि IOA की ओर से FIS को एक पत्र भेजा गया, जिसमें भारत में एक नई skiing federation को अंतरराष्ट्रीय सदस्यता दिलाने की सिफारिश की गई थी। इसी आधार पर FIS की General Body Meeting में उस नई federation को सदस्यता देने का प्रस्ताव पारित हो गया।
FIS के तत्कालीन अध्यक्ष योहान एलिएश ने बैठक में कहा कि लगभग चार साल पहले India Ski and Snow Association की स्थिति अनिश्चित थी, मामला अदालत तक पहुंचा और भारतीय अदालतों के कुछ फैसलों को IOA ने स्वीकार नहीं किया। किसी अंतरराष्ट्रीय मंच पर ऐसा बयान भारतीय खेल प्रशासन के लिए बेहद शर्मनाक और गंभीर है।
दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश और IOA की भूमिका
Ski and Snowboard India का मामला पहले ही दिल्ली हाई कोर्ट तक पहुंच चुका था। IOA ने इस federation के कामकाज पर नियंत्रण के लिए एक ad-hoc committee का गठन किया था। लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट ने इस committee को भंग कर दिया और रिटायर्ड जज की निगरानी में चुनाव कराने का आदेश दिया। वह प्रक्रिया पूरी भी हुई।
इसके बावजूद IOA ने FIS को पत्र लिखकर एक नई federation को मान्यता दिलाने की कोशिश की — जो कथित रूप से मात्र एक महीना पुरानी थी। यह घटनाक्रम कई गंभीर सवाल खड़े करता है:
यह पत्र IOA की ओर से किसने और किस अधिकार से भेजा?
क्या IOA Executive Committee या General Body ने इस पर कोई औपचारिक निर्णय लिया था?
क्या अदालत की निगरानी में हुई चुनावी प्रक्रिया को IOA नकार सकता है?
अगर हाई कोर्ट के आदेश को नहीं माना जाता, तो क्या यह अदालत की अवमानना नहीं बनता?
नई federation बनाकर नियंत्रण की कोशिश?
विश्लेषकों का मानना है कि पहले ad-hoc committee के जरिए और अब एक नई federation खड़ी करके Ski and Snowboard India को किनारे करने की कोशिश की जा रही है। सूत्रों के अनुसार IOA के कुछ प्रभावशाली लोग और एक पूर्व board member Ski and Snowboard India के मौजूदा नेतृत्व से असंतुष्ट हैं और वे इसे नियंत्रित करने की कोशिश में लगे हैं।
हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है, लेकिन घटनाक्रम की दिशा इस संभावना को नकारती नहीं।
यदि IOA के आधिकारिक letterhead और पद का इस्तेमाल किसी व्यक्तिगत या गुटीय हित के लिए हो रहा है, तो यह IOA की संस्थागत गरिमा के लिए गहरा धब्बा है।
खिलाड़ियों पर पड़ेगा सीधा असर
भारत में winter sports पहले से ही सीमित संसाधनों, कम infrastructure और कम media visibility से जूझ रहे हैं। ऐसे में लगातार प्रशासनिक अस्थिरता सीधे खिलाड़ियों की तैयारी और अंतरराष्ट्रीय भागीदारी को प्रभावित करती है।
अगर Ski and Snowboard India की FIS सदस्यता खत्म हो जाती है या उसे एक नई संस्था से replace किया जाता है, तो भारतीय winter sports के एथलीटों के अंतरराष्ट्रीय करियर पर इसका सीधा नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
Karate India को भी पत्र — एक pattern उभर रहा है?
यह पहला मामला नहीं है। हाल ही में IOA ने Karate India Organisation के खिलाफ भी एक पत्र लिखा है, जो विवाद का विषय बना हुआ है। बार-बार ऐसे मामलों में IOA की भूमिका एक गहरे pattern की ओर इशारा करती है — जिसमें विवाद सुलझाने की बजाय नए विवाद पैदा होते दिख रहे हैं।
PT Usha और IOA नेतृत्व से क्या अपेक्षाएं थीं?
IOA अध्यक्ष पी. टी. उषा भारत की महान एथलीट हैं और उनके नाम को हमेशा सम्मान मिलेगा। उनसे उम्मीद थी कि उनके नेतृत्व में IOA खिलाड़ियों की आवाज बनेगा, खेल प्रशासन में पारदर्शिता आएगी। लेकिन पिछले दो-तीन वर्षों में IOA लगातार internal conflicts और administrative विवादों में घिरा रहा।
उनका कार्यकाल अब समाप्ति की ओर है। यह समय है कि वे ऐसे फैसले लें जिनसे उन्हें सुधारों और खिलाड़ियों के हित के लिए याद किया जाए — न कि federation disputes और विवादित पत्राचार के लिए।
क्या होना चाहिए अब?
IOA Executive Committee को स्वयं इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए। जांच होनी चाहिए:
FIS को पत्र किसने भेजा और किस authority से?
क्या IOA President की लिखित स्वीकृति थी?
क्या Executive Committee को इसकी जानकारी थी?
क्या किसी वैधानिक मंच पर इस विषय पर चर्चा हुई?
अगर कोई व्यक्ति IOA के नाम और letterhead का इस्तेमाल व्यक्तिगत हित के लिए कर रहा है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई जरूरी है।
निष्कर्ष:
यह विवाद सिर्फ Ski and Snowboard India की FIS सदस्यता का नहीं है। यह भारतीय खेल प्रशासन की विश्वसनीयता और न्यायिक आदेशों के सम्मान का मामला है। जब एक अंतरराष्ट्रीय federation के मंच से यह कहा जाए कि IOA ने भारतीय अदालतों के फैसलों को नहीं माना, तो यह पूरे देश के लिए चिंता का विषय है।
भारतीय खेल प्रशासन को चाहिए कि वह खिलाड़ियों को केंद्र में रखे, न कि गुटीय राजनीति को। Winter sports को विवाद नहीं, समर्थन और स्थिरता चाहिए।







