नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने ऑल इंडिया टेनिस एसोसिएशन (AITA) के प्रशासन और चुनाव प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा है कि संघ के संविधान और उपनियमों को राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम, 2025 के अनुरूप संशोधित किया जाए और नई व्यवस्था के तहत 30 सितंबर 2026 तक चुनाव कराए जाएं।
दिल्ली हाईकोर्ट की खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि AITA के संविधान में किए जाने वाले संशोधनों पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार उसकी जनरल बॉडी के पास रहेगा। प्रस्तावित बदलावों को जनरल बॉडी के सामने प्रत्येक प्रावधान के अनुसार विचार और मतदान के लिए रखा जाएगा।
31 जुलाई तक बुलाई जाएगी विशेष आम बैठक
अदालत ने निर्देश दिया है कि प्रस्तावित संवैधानिक संशोधनों पर विचार के लिए 31 जुलाई 2026 तक AITA की एक्स्ट्राऑर्डिनरी जनरल मीटिंग आयोजित की जाए।
बैठक में संशोधित संविधान के प्रत्येक महत्वपूर्ण प्रावधान पर चर्चा और मतदान किया जाएगा। इसके बाद स्वीकृत संविधान के आधार पर नई चुनाव प्रक्रिया शुरू होगी।
यह निर्देश इंटरनेशनल टेनिस फेडरेशन द्वारा भेजे गए पत्र और AITA में लंबे समय से चल रहे प्रशासनिक विवादों की पृष्ठभूमि में आया है।
30 सितंबर तक नए चुनाव कराने होंगे
दिल्ली हाईकोर्ट ने AITA के प्रशासक को चुनाव प्रक्रिया तेजी से पूरी करने का निर्देश दिया है। नए संविधान के अनुमोदन के बाद AITA की कार्यकारिणी के नए चुनाव 30 सितंबर 2026 तक कराने होंगे।
अदालत का यह आदेश भारतीय खेल महासंघों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम, 2025 लागू होने के बाद खेल संस्थाओं को अपने संविधान, चुनाव प्रक्रिया, पदाधिकारियों की पात्रता और कार्यकाल संबंधी नियमों में बदलाव करना पड़ रहा है।
AITA में लंबे समय से चल रहा प्रशासनिक विवाद
AITA के सितंबर 2024 के चुनाव, पदाधिकारियों की पात्रता और खेल प्रशासन संबंधी नियमों के अनुपालन को लेकर मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा था।
अप्रैल 2026 में अदालत ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल को AITA का प्रशासक नियुक्त किया था। प्रशासक को संघ के संविधान में आवश्यक संशोधन कराने और नए चुनाव की निगरानी का दायित्व दिया गया।
हालांकि बाद में प्रशासक और अंतरिम कार्यकारिणी के बीच अधिकार क्षेत्र तथा निर्णय प्रक्रिया को लेकर मतभेद भी सामने आए।
जनरल बॉडी को मिली संवैधानिक सर्वोच्चता
दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने निर्देश में एक महत्वपूर्ण सिद्धांत स्थापित किया है कि किसी खेल महासंघ के संविधान में संशोधन केवल प्रशासक या कुछ पदाधिकारियों द्वारा अंतिम रूप से लागू नहीं किया जा सकता।
संशोधनों पर निर्णय संघ की जनरल बॉडी द्वारा लोकतांत्रिक प्रक्रिया से लिया जाना चाहिए। इससे सदस्य इकाइयों को प्रस्तावित बदलावों पर चर्चा और मतदान का अधिकार मिलेगा।
अन्य खेल महासंघों के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत
AITA का मामला उन राष्ट्रीय खेल महासंघों के लिए महत्वपूर्ण है जो राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम, 2025 के अनुसार अपने संविधान और चुनाव नियमों में बदलाव कर रहे हैं।
अदालत के निर्देश से यह संकेत मिलता है कि केवल संशोधित संविधान का मसौदा तैयार करना पर्याप्त नहीं होगा। उसे सक्षम जनरल बॉडी से उचित प्रक्रिया के तहत अनुमोदित कराना और उसके बाद समयबद्ध चुनाव कराना भी आवश्यक होगा।
खिलाड़ियों के हित में जल्द समाधान जरूरी
खेल संघों में लंबे समय तक चलने वाले प्रशासनिक विवादों का असर खिलाड़ियों, चयन प्रक्रिया, राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और अंतरराष्ट्रीय भागीदारी पर पड़ता है।
अब सबकी नजर AITA की 31 जुलाई तक प्रस्तावित विशेष आम बैठक और 30 सितंबर तक होने वाले चुनावों पर रहेगी। यह प्रक्रिया भारतीय टेनिस प्रशासन में स्थिरता और पारदर्शिता बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।









